सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में मानसून की मार झेल रहे किसानों ने बारिश के लिए एक अनूठा उपाय अपनाया है। प्रतापपुर ब्लॉक के धोन्धा गांव में किसानों ने पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार मेंढक और मेंढकी का विवाह कराया, जिसमें पूरे गांव ने भाग लिया।
बारिश की कमी के कारण इस क्षेत्र के किसान गंभीर संकट में हैं। धान की रोपाई का समय निकलता जा रहा है लेकिन खेतों में पानी की किल्लत के कारण कृषि कार्य ठप पड़े हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए ग्रामीणों ने सदियों पुरानी परंपरा का सहारा लिया।
आदिवासी समुदाय में प्रचलित इस मान्यता के अनुसार मेंढक-मेंढकी के विवाह से इंद्र देव प्रसन्न होकर अच्छी वर्षा करते हैं। इसी विश्वास के साथ गांववासियों ने पूरी धूमधाम से यह विवाह समारोह आयोजित किया। बैंड-बाजे के साथ निकाली गई बारात में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए।
विवाह की रस्में बिल्कुल इंसानों की शादी की तरह निभाई गईं। मेंढक-मेंढकी को विशेष रूप से सजाया गया, मंडप तैयार किया गया और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विवाह संस्कार संपन्न हुआ। महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए और सभी ने मिलकर लोक नृत्य किया।
स्थानीय किसान रामलाल यादव का कहना है कि पिछले महीने शुरुआती बारिश के बाद से मौसम सूखा रहा है। धान की नर्सरी तैयार है लेकिन रोपाई नहीं हो पा रही है। अगर जल्दी बारिश नहीं हुई तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस साल मानसून में देरी से छत्तीसगढ़ के कई जिलों में कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। सूरजपुर जिले में अब तक सामान्य से 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे किसान चिंतित हैं।
गांव के मुखिया सुरेश साहू बताते हैं कि यह परंपरा उनके पूर्वजों से चली आ रही है और कई बार इसके बाद अच्छी बारिश हुई है। यह सिर्फ अंधविश्वास नहीं बल्कि प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने की हमारी संस्कृति है।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में राज्य के कई हिस्सों में बारिश की संभावना है, लेकिन किसान पारंपरिक उपायों के साथ प्रकृति से प्रार्थना कर रहे हैं। यह घटना दर्शाती है कि आधुनिक युग में भी ग्रामीण भारत में पुरानी मान्यताओं और प्राकृतिक शक्तियों में आस्था कायम है।