छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के समीप स्थित गरियाबंद जिले में सुरक्षा बलों ने नक्सली गतिविधियों के खिलाफ एक और सफल कार्रवाई को अंजाम दिया है। मैनपुर क्षेत्र के पंडरीपानी और सिकासेर के घने वन क्षेत्रों में छुपे नक्सली अड्डे से विस्फोटक सामग्री और युद्ध सामग्री की बरामदगी के साथ ही उग्रवादियों की एक बड़ी साजिश को विफल कर दिया गया है।
छत्तीसगढ़ में नक्सली समस्या से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की निरंतर चलने वाली कार्रवाइयों का यह एक और सफल उदाहरण है। राज्य सरकार और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संयुक्त रणनीति के तहत इस तरह के ऑपरेशन लगातार चलाए जा रहे हैं जिससे नक्सली संगठनों की कमर तोड़ने में मदद मिल रही है।
गुप्त सूचना के आधार पर शुरू हुआ ऑपरेशन
12 अगस्त की प्रातःकाल में प्राप्त गुप्त जानकारी के आधार पर स्थानीय जिला पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल की D/62 बटालियन की संयुक्त टीम ने इस महत्वपूर्ण तलाशी अभियान को शुरू किया। सुरक्षाकर्मियों ने कठिन पहाड़ी इलाकों और सघन वनों से होकर उस दुर्गम स्थान तक का सफर तय किया जहां नक्सलियों ने अपना अस्थायी शिविर स्थापित किया था।
यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन नक्सलियों ने इसी एकांत का फायदा उठाकर अपनी गुप्त गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश की थी। हालांकि, सुरक्षा बलों की सतर्कता और बेहतर इंटेलिजेंस नेटवर्क के कारण उनकी यह योजना सफल नहीं हो सकी।
भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री की बरामदगी
ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों के हाथ जो सामग्री लगी है, वह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि नक्सली संगठन सुरक्षा बलों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर हमले की तैयारी कर रहे थे। बरामद सामान में छह नए प्रेशर कुकर सबसे चिंताजनक वस्तु हैं क्योंकि इनका उपयोग आमतौर पर इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बनाने के लिए किया जाता है।
इसके अतिरिक्त IED निर्माण में उपयोग होने वाले अन्य घटक भी मिले हैं जो दिखाते हैं कि नक्सली एक व्यापक विस्फोटक हमले की योजना बना रहे थे। चिकित्सा उपकरण, इंजेक्शन, और पट्टियों की उपस्थिति से पता चलता है कि वे लंबे समय तक इस स्थान पर रुकने की तैयारी कर रहे थे।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि पोस्टर मुद्रण के उपकरण भी बरामद हुए हैं, जो इस बात का संकेत देते हैं कि नक्सली प्रचार गतिविधियों को भी अंजाम देने की योजना बना रहे थे। यह उनकी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसके माध्यम से वे स्थानीय आबादी में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करते हैं।
क्षेत्र में बढ़ती नक्सली गतिविधियों का विश्लेषण
हाल के महीनों में इस क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। धमकी भरे पोस्टर और बैनर का दिखना इस बात का प्रमाण है कि उग्रवादी संगठन फिर से अपनी गतिविधियों को तेज करने की कोशिश कर रहे हैं। इन प्रचार सामग्रियों में सुरक्षा बलों के विरुद्ध धमकियां दी गई थीं, जो उनकी आक्रामक मानसिकता को दर्शाती हैं।
छत्तीसगढ़ में नक्सली समस्या का इतिहास काफी पुराना है और राज्य सरकार इसे जड़ से समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। गरियाबंद जिला भौगोलिक दृष्टि से नक्सलियों के लिए एक रणनीतिक महत्व रखता है क्योंकि यह राजधानी रायपुर के नजदीक स्थित है और घने जंगलों से घिरा हुआ है।
सुरक्षा बलों की रणनीति और तैयारी
इस सफल ऑपरेशन से सुरक्षा बलों की बेहतर तैयारी और रणनीतिक सोच का पता चलता है। स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच बेहतर समन्वय इस सफलता का मुख्य कारण है। D/62 बटालियन सीआरपीएफ की भागीदारी इस ऑपरेशन को और भी प्रभावी बनाती है क्योंकि यह विशेष रूप से नक्सली रोधी अभियानों के लिए प्रशिक्षित है।
सुरक्षा बलों की इंटेलिजेंस नेटवर्क में सुधार का परिणाम यह है कि गुप्त सूचनाओं के आधार पर समय पर कार्रवाई की जा सकी। यह दिखाता है कि स्थानीय लोगों का सहयोग भी मिल रहा है और वे संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को दे रहे हैं।
नक्सली रणनीति में बदलाव के संकेत
बरामद सामग्री से पता चलता है कि नक्सली संगठन अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। प्रेशर कुकर और IED बनाने वाली सामग्री का उपयोग दिखाता है कि वे अब अधिक घातक और प्रभावी हथियारों का उपयोग करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यह एक चिंताजनक विकास है जिससे सुरक्षा बलों को और भी सतर्क रहने की आवश्यकता है।
चिकित्सा सामग्री की उपस्थिति इस बात का संकेत देती है कि वे अपने घायल साथियों के इलाज के लिए भी तैयारी कर रहे थे। यह दिखाता है कि उनकी योजना लंबी अवधि की थी और वे बड़े पैमाने पर गतिविधियों की तैयारी कर रहे थे।
राज्य सरकार की नक्सल विरोधी नीति
छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने नक्सली समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति अपनाई है जिसमें सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ विकास कार्यों पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य 2026 तक छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाना है।
इस दिशा में सुरक्षा बलों के लिए बेहतर उपकरण और प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेज किया गया है ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें और वे नक्सली विचारधारा से दूर रहें।
स्थानीय समुदाय की भूमिका
इस सफल ऑपरेशन में स्थानीय समुदाय की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। गुप्त सूचना मिलना इस बात का प्रमाण है कि लोग सुरक्षा बलों के साथ सहयोग कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल दें।
स्थानीय लोगों का यह सहयोग नक्सली संगठनों के लिए एक बड़ी चुनौती है क्योंकि उनकी गुप्त गतिविधियों का पता लगना आसान हो जाता है। यह दिखाता है कि आम जनता नक्सली हिंसा से तंग आ चुकी है और शांति चाहती है।