कांकेर, छत्तीसगढ़ | 29 जुलाई, 2025
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में धर्मांतरण और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर भड़का विवाद एक गंभीर सामाजिक-धार्मिक संघर्ष का रूप ले चुका है, जिसने पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना दिया है। नरहरपुर थाना क्षेत्र के जामगांव में 40 वर्षीय सोमलाल राठौर, जो मूलतः आदिवासी समुदाय से था और जिसने लगभग तीन साल पहले हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाया था, की 26 जुलाई को बीमारी के कारण अचानक मृत्यु हो गई। 27 जुलाई को उसके परिवारजनों ने ईसाई रीति-रिवाज के अनुसार उसे अपने खेत की जमीन पर दफना दिया, जो स्थानीय ग्रामीणों के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बन गया।
स्थानीय आदिवासी और हिंदू समुदाय के लोगों का कहना है कि गांव की पवित्र भूमि पर ईसाई अंतिम संस्कार करना उनकी “देव प्रथा” और सदियों पुरानी परंपराओं का सीधा उल्लंघन है। ग्रामीणों का मानना था कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति का अंतिम संस्कार गांव से दूर किसी कब्रिस्तान में होना चाहिए, न कि गांव की मुख्य भूमि पर। इस मामले को लेकर तनाव धीरे-धीरे बढ़ता गया और 28 जुलाई सोमवार को स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई। लगभग 500 से 1000 लोगों की भारी भीड़ ने स्थानीय चर्च पर धावा बोला और व्यापक हिंसा और तोड़फोड़ की। वायरल हुए वीडियो फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि कैसे उग्र भीड़ ने चर्च की छत को फाड़ा, अंदर का सारा सामान बाहर फेंका, बर्तन-भांडे तोड़े, फर्नीचर को नुकसान पहुंचाया और आसपास के घरों में भी तोड़फोड़ की।
घटना में एक नया और गंभीर मोड़ तब आया जब मृतक के भाई भुनेश्वर राठौर ने हत्या की गंभीर आशंका जताते हुए आरोप लगाया कि उसके भाई सोमलाल की मौत प्राकृतिक कारणों से नहीं बल्कि किसी साजिश के तहत हुई है। उन्होंने दावा किया कि परिवार के मुख्य सदस्यों को उचित जानकारी दिए बिना सोमलाल को गुप्त रूप से और जल्दबाजी में दफनाया गया, जो अत्यंत संदेहास्पद परिस्थितियों का संकेत देता है। इस गंभीर आरोप के कारण स्थानीय प्रशासन और पुलिस प्राधिकरण की मौजूदगी में कब्र को खोदा गया और शव को बाहर निकालकर तत्काल पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
कांकेर जिला कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पुलिस अधीक्षक आईके एलिसेला ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती की है और स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चलेगा और उसी के आधार पर आगे की न्यायिक और कानूनी कार्रवाई का निर्धारण किया जाएगा। यह घटना उस समय हुई है जब छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के मुद्दे पर पहले से ही तनावपूर्ण माहौल है, विशेष रूप से हाल ही में भिलाई में ननों की हिरासत के विवादास्पद मामले के कारण। इस कांकेर घटना ने धर्मांतरण, स्थानीय परंपराओं की संवेदनशीलता, व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता और सामुदायिक सद्भावना के बीच एक जटिल संघर्ष को उजागर किया है, जिसके दूरगामी सामाजिक और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।