रायपुर, 25 जुलाई – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे खरोरा-तिल्दा क्षेत्र में नलवा सीमेंट प्लांट की प्रस्तावित खदान परियोजना के विरोध में स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। शुक्रवार को मूसलाधार बारिश के बीच मोतिमपुर क्षेत्र में छह गांवों के करीब 900 ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया और परियोजना को तत्काल रद्द करने की मांग की।
ब्लास्टिंग से घरों की नींव हिलने का डर
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खदान से चूना पत्थर निकालने के लिए होने वाली ब्लास्टिंग (विस्फोट) से उनके घरों की नींव हिल जाएगी और उनका जीवन खतरे में पड़ जाएगा। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन और कंपनी ने उनकी बात नहीं सुनी तो वे आत्मदाह जैसे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे।
पर्यावरण और आजीविका पर प्रभाव की चिंता
ग्रामीणों की मुख्य चिंताएं निम्नलिखित हैं:
- पर्यावरणीय क्षति: खनन से धूल-मिट्टी, प्रदूषण और जल स्तर में गिरावट
- कृषि पर असर: कृषि भूमि का नुकसान और फसलों को हानि
- सामुदायिक संपत्ति का नुकसान: श्मशान घाट, चारागाह और गौठान जैसी सुविधाओं पर संकट
- स्थानीय रोजगार का अभाव: कंपनी के दावों के विपरीत स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलना
जनप्रतिनिधियों का समर्थन
क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने भी ग्रामीणों का साथ देते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि खनन परियोजना से क्षेत्र की पारिस्थितिकी, जल संसाधन और ग्रामीण जीवनशैली पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
प्रशासनिक तैयारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में 400 सुरक्षाकर्मी तैनात किए हैं। हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे।
आगे की राह
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
- नलवा सीमेंट खदान परियोजना का तत्काल निरस्तीकरण
- क्षेत्र को विस्फोटक गतिविधियों से मुक्त रखना
- पर्यावरण और जनजीवन की सुरक्षा की गारंटी
- ग्रामीणों की सहमति के बिना कोई औद्योगिक गतिविधि न करना
वर्तमान में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और ग्रामीणों के आत्मदाह की चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी है। अब देखना यह है कि प्रशासन और कंपनी किस तरह से इस गतिरोध का समाधान निकालते हैं और स्थानीय समुदाय की चिंताओं का निवारण करते हैं।