कोरबा, 2 अगस्त – छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला जेल से शुक्रवार दोपहर एक गंभीर सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है। दुष्कर्म के आरोप में बंद चार विचाराधीन कैदी बेहद चतुराई और योजनाबद्ध तरीके से जेल की 25 फीट ऊंची दीवार फांदकर फरार हो गए। पूरी घटना महज 15 मिनट में घटित हुई और CCTV कैमरे में कैद हो गई, जिससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बिजली गुल होते ही मिला मौका
घटना का समय दोपहर 3:09 बजे था जब अचानक जेल परिसर में बिजली चली गई। इसी अंधेरे का फायदा उठाकर चारों आरोपियों ने अपनी योजना को अंजाम दिया। जेल प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखर राठिया, दशरथ सिदार, राज कंवर और सरना भीकू नामक ये चारों कैदी POCSO एक्ट और धारा 376 के तहत दुष्कर्म के गंभीर आरोप में बंद थे।
CCTV फुटेज से पता चलता है कि आरोपियों ने अत्यंत साहसिक तरीके से जेल की मुख्य दीवार पर चढ़ाई की और फेंसिंग वायर को पार करते हुए बाहरी दीवार से छलांग लगा दी। पूरी प्रक्रिया में उन्हें केवल 15 मिनट का समय लगा, जो जेल सुरक्षा की गंभीर कमियों को उजागर करता है।
सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के दौरान जेल गार्ड्स को कुछ पता ही नहीं चला। रिपोर्ट्स के अनुसार, उस समय ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी मवेशियों की देखभाल में व्यस्त थे। यह स्थिति जेल प्रशासन की लापरवाही और अव्यवसायिकता को दर्शाती है।
जेल सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, 25 फीट की ऊंची दीवार को पार करना आसान काम नहीं है और इसके लिए पूर्व योजना तथा उचित साधनों की आवश्यकता होती है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कैदियों के पास पर्याप्त समय और अवसर था जो केवल सुरक्षा व्यवस्था की शिथिलता के कारण ही संभव हो सका।
तुरंत कार्रवाई, व्यापक तलाश
घटना की जानकारी मिलते ही कोरबा पुलिस और जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामला तुरंत सिविल लाइन थाना में दर्ज किया गया और पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक ने सभी चौकियों को तत्काल सक्रिय करने और संदिग्ध व्यक्तियों की चेकिंग तेज करने के निर्देश दिए हैं।
फरार आरोपियों की तलाश में विशेष टीमों का गठन किया गया है और आसपास के इलाकों में व्यापक छापेमारी शुरू की गई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि CCTV फुटेज का विस्तृत विश्लेषण करके आरोपियों के भागने की दिशा का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासनिक जवाबदेही तय होगी
इस घटना के बाद जेल सुरक्षा प्रणाली की समीक्षा की मांग तेज हो गई है। स्थानीय विधायकों और सामाजिक संगठनों ने जेल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विशेषकर दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामलों में आरोपियों का इस तरह फरार हो जाना न्याय व्यवस्था पर प्रश्न खड़े करता है।
गृह विभाग ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। जेल मैनुअल के अनुसार, ऐसी घटनाओं के लिए संबंधित अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार होते हैं।
दुष्कर्म पीड़िताओं के परिवार भी इस घटना से व्यथित हैं और न्याय में देरी की आशंका जता रहे हैं। उनका कहना है कि आरोपियों के फरार होने से मामले की गंभीरता और भी बढ़ गई है।
पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी आरोपी गिरफ्त में आ जाएंगे, लेकिन यह घटना छत्तीसगढ़ की जेल सुरक्षा व्यवस्था पर एक काला धब्बा साबित हुई है।