Durg-Bhilai में 765 एकड़ भूमि घोटाले का खुलासा, पटवारी की आईडी हैक कर भूमाफियाओं ने की करोड़ों की धोखाधड़ी

छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई में एक बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है जिसमें भू-माफियाओं ने भुइयां ऐप के माध्यम से पटवारी की डिजिटल आईडी हैक करके 765 एकड़ से अधिक सरकारी और निजी जमीन पर अवैध कब्जा जमाया है। इस घोटाले में साइबर क्राइम और भूमि धोखाधड़ी का अनूठा मिश्रण देखने को मिला है।

मुरमुंदा पटवारी हल्के के चार गांवों मुरमुंदा, अछोटी, चेटुवा और बोरसी में हुई इस बड़ी हेराफेरी में भू-माफियाओं ने भुइयां पोर्टल की सुरक्षा भेदकर नकली खसरा नंबर बनाए और जमीन के कागजात में फर्जीवाड़ा किया। मुरमुंदा में 97 हेक्टेयर, अछोटी में 72 हेक्टेयर, चेटुवा में 87 हेक्टेयर और बोरसी में 47 हेक्टेयर जमीन इस घोटाले का शिकार बनी।

इस भूमि घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपियों ने अवैध रूप से हस्तगत की गई जमीन को बैंकों में गिरवी रखकर करोड़ों रुपए का लोन भी हासिल किया। दिनूराम यादव ने 25 जून को 46 लाख रुपए का ऋण लिया जबकि 2 जुलाई को एक अन्य व्यक्ति ने 36 लाख रुपए का लोन प्राप्त किया।

छत्तीसगढ़ सरकार की जांच में सामने आया है कि यह एक संगठित सिंडिकेट का काम है जिसके तार रायपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ और कोरबा तक फैले हुए हैं। दिनूराम यादव, एसराम, शियाकांत वर्मा, हरिशचंद्र निषाद, सुरेंद्र कुमार और जयंत जैसे कई लोग इस भूमि माफिया नेटवर्क में शामिल पाए गए हैं।

डिप्टी मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि चाहे 765 एकड़ हो या 765 इंच की भूमि हो, किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पाटन के पटवारी मनोज नायक और मुरमुंदा के पटवारी कृष्ण कुमार सिन्हा को निलंबित कर दिया है।

दुर्ग संभाग आयुक्त सत्यनारायण राठौर ने बताया कि धारा 115/16 के तहत एसडीएम द्वारा मामला दर्ज करके भूमि रिकॉर्ड में हुई गड़बड़ी को सुधार दिया गया है। प्रशासन ने 18 पटवारियों का स्थानांतरण भी किया है और एनआईसी से आईडी हैकिंग की तकनीकी जानकारी एकत्रित की जा रही है।

यह घटना डिजिटल भूमि प्रबंधन प्रणाली की साइबर सुरक्षा में सुधार की तत्काल आवश्यकता को दर्शाती है। छत्तीसगढ़ में भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के बाद यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर तकनीकी हेराफेरी का मामला सामने आया है। राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिस्टम की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।

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