महादेव सट्टा एप घोटाला: दुबई से भागे आरोपी अब कोर्ट से मांग रहे हैं समर्पण की मोहलत, 6000 करोड़ के घोटाले में नया मोड़

"News graphic featuring the golden Mahadev Book logo with crown in diamond shape against dark background with silhouettes, displaying text 'MAHADEV SATTA APP SCAM' in large golden letters below the logo, created for news coverage of the ₹6,000 crore betting scandal case."

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सट्टेबाजी घोटाले में एक नया मोड़ सामने आया है। 6000 करोड़ रुपये के महादेव सट्टा एप घोटाले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल, जो पिछले तीन सालों से दुबई में छुपे हुए थे, अब अचानक कोर्ट से आत्मसमर्पण के लिए तीन महीने की मोहलत मांग रहे हैं। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब केंद्र सरकार इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय दबाव बना रही है और दुबई सरकार से प्रत्यर्पण की मांग कर रही है।

शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष अदालत में दायर गैर-जमानती वारंट रद करने की अर्जी पर सुनवाई के दौरान आरोपितों के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल स्वेच्छा से भारत वापस आकर आत्मसमर्पण करने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने इसके लिए तीन महीने का समय मांगा है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है और अब 3 नवंबर को इस पर फैसला आएगा।

घोटाले की विशाल संरचना का खुलासा

प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह बात सामने आई है कि महादेव एप केवल एक सट्टेबाजी एप्लिकेशन नहीं बल्कि एक विशाल अंतर्राष्ट्रीय सिंडिकेट था। इस सिंडिकेट का मुख्यालय दुबई में था और इसकी शाखाएं भारत सहित कई देशों में फैली हुई थीं। जांच से पता चला है कि यह एप क्रिप्टोकरेंसी, हवाला ट्रांजैक्शन और बेनामी बैंक खातों के जरिए अरबों रुपये का काला धन सफेद कर रहा था।

महादेव एप का संचालन तंत्र:

  • यूजर पंजीकरण के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल
  • क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पैसों का आदान-प्रदान
  • हवाला नेटवर्क के जरिए अंतर्राष्ट्रीय मनी ट्रांसफर
  • बेनामी बैंक खातों में पैसों की पार्किंग

राजनीतिक संरक्षण के आरोप

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपितों को कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की पूर्व सरकार के कई नेताओं और अधिकारियों का इस घोटाले में संभावित संबंध है। यही कारण है कि तीन साल तक यह एप बिना किसी रुकावट के चलता रहा और अरबों रुपये का टर्नओवर हुआ।

राजनीतिक संरक्षण के संकेत:

  • एप के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं होना
  • स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता
  • जांच में देरी और बाधाएं
  • मुख्य आरोपियों का आसानी से देश छोड़कर भागना

अंतर्राष्ट्रीय आयाम और दुबई कनेक्शन

महादेव एप घोटाले का सबसे गंभीर पहलू इसका अंतर्राष्ट्रीय आयाम है। सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने दुबई को अपना ठिकाना बनाया और वहां से इस विशाल सट्टेबाजी नेटवर्क को संचालित किया। दुबई की कानूनी व्यवस्था और वहां के बिजनेस फ्रेंडली माहौल का फायदा उठाकर उन्होंने अपने अवैध धंधे को वैध बिजनेस के रूप में प्रस्तुत किया।

भारत सरकार ने दुबई सरकार से इन आरोपितों के प्रत्यर्पण की मांग की है, लेकिन अभी तक इसमें कोई सफलता नहीं मिली है। यही कारण है कि अब ये आरोपी खुद से आत्मसमर्पण करने की बात कह रहे हैं, जो संदिग्ध लगता है।

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आम लोगों पर प्रभाव

इस घोटाले का सबसे दुखद पहलू यह है कि इसने हजारों आम लोगों की जिंदगी बर्बाद की है। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के हजारों युवा इस एप के जरिए सट्टेबाजी में फंसे और अपनी जमा-पूंजी गंवा बैठे। कई परिवारों में तलाक और आत्महत्या के मामले भी सामने आए हैं।

समाज पर प्रभाव:

  • युवाओं में जुए की लत में वृद्धि
  • पारिवारिक कलह और टूटते रिश्ते
  • आर्थिक नुकसान से आत्महत्या के मामले
  • सामाजिक मूल्यों का ह्रास

जांच एजेंसियों की कार्रवाई

पिछले तीन वर्षों में इस मामले में तीन हजार से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई है। प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और राज्य पुलिस की संयुक्त टीमें काम कर रही हैं। अब तक सैकड़ों करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है, लेकिन मुख्य आरोपियों तक पहुंचना अभी भी चुनौती बनी हुई है।

भविष्य की संभावनाएं

3 नवंबर को आने वाला कोर्ट का फैसला इस मामले की दिशा तय करेगा। यदि कोर्ट तीन महीने की मोहलत देता है, तो इससे आरोपितों को और भी समय मिल जाएगा अपनी रणनीति बनाने के लिए। दूसरी ओर, यदि कोर्ट गैर-जमानती वारंट बरकरार रखता है, तो जांच एजेंसियों के पास अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाने के लिए और मजबूत आधार होगा।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत की न्यायिक व्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय कानूनी सहयोग की परीक्षा है। इसका परिणाम भविष्य में इस तरह के मामलों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

महादेव एप घोटाला केवल एक सट्टेबाजी का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक सुरक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मसला है। इसका न्यायसंगत समाधान देश की न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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