कोरबा में महिला ने ट्रेलर के नीचे कूदकर की आत्महत्या, CCTV में कैद हुई दुर्घटना

कोरबा (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बुधवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। पाली थाना क्षेत्र के पाली-दीपका मुख्य मार्ग पर स्थित ग्राम बांधाखार के एसबीआई किओस्क बैंक के पास एक महिला ने तेज रफ्तार ट्रेलर के नीचे कूदकर आत्महत्या कर ली। यह पूरी घटना आसपास लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है और इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

घटना का विवरण

सुबह के समय महिला बैंक से पैसे निकालने के लिए आई थी। बैंक से पैसे निकालने के बाद वह सड़क किनारे खड़ी हो गई। CCTV फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि महिला कुछ देर तक सड़क किनारे खड़ी रही, फिर अचानक तेज रफ्तार से आती हुई ट्रेलर के सामने कूद गई। घटना इतनी तेजी से घटी कि आसपास मौजूद लोग कुछ भी नहीं कर पाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के समय महिला अकेली थी और उसने किसी से कोई बात नहीं की थी। ट्रेलर चालक घटना के तुरंत बाद अपना वाहन लेकर मौके से फरार हो गया, जिसकी तलाश पुलिस कर रही है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि

पुलिस की प्रारंभिक जांच से पता चला है कि मृतक महिला के पति की मौत पहले ही हो चुकी थी। विधवा होने के बाद से वह गंभीर मानसिक तनाव में थी। परिवारिक सूत्रों के अनुसार, महिला अपने मायके में रहती थी और कभी-कभार ससुराल भी जाती थी। पति की मृत्यु के बाद से उसकी मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी।

“वह अक्सर उदास रहती थी और अकेलेपन का शिकार हो गई थी। घर के सदस्यों ने उसे समझाने की कोशिश की थी, लेकिन वह किसी की बात नहीं सुनती थी,” एक पारिवारिक सदस्य ने बताया।

पुलिस की कार्रवाई

पाली थानेदार ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस ने मर्ग दर्ज करके मामले की जांच शुरू कर दी है।

“CCTV फुटेज के आधार पर हम घटना की विस्तृत जांच कर रहे हैं। ट्रेलर चालक की पहचान करके उसे गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी की जा रही है,” पुलिस अधिकारी ने कहा।

सामाजिक चिंता का विषय

यह घटना मानसिक स्वास्थ्य की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पति की मृत्यु के बाद महिलाओं को भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है, लेकिन सामाजिक ढांचे में इसकी कमी देखने को मिलती है।

मनोचिकित्सक डॉ. राजेश शर्मा का कहना है, “ऐसी घटनाएं तब होती हैं जब व्यक्ति को लगता है कि उसके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। समय रहते काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का सहारा लेना जरूरी है।”

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