Mirror Chhattisgarh की पत्रकार सोमा देवांगन को मिली जान से मारने की धमकी, महिला हिंसा पर रिपोर्टिंग के बाद बढ़ा विवाद

A female journalist in a pink dress and black cardigan conducting a street interview with a man in a white striped shirt and blue jeans, holding a microphone with a news channel logo in an outdoor urban setting with trees and paved walkway in the background.


रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिला पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक नया मामला सामने आया है। Mirror Chhattisgarh की पत्रकार सोमा देवांगन को 13 अगस्त की रिपोर्टिंग के बाद से लगातार जान से मारने की धमकी मिल रही है। महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार की खबर प्रकाशित करने के बाद से सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

योगेश साईनी समेत कई असामाजिक तत्व सोमा देवांगन को “चाकू से मार देंगे” और “जिंदा नहीं छोड़ेंगे” जैसी धमकियां दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें और पूरी देवांगन जाति को जातिगत गालियां भी दी जा रही हैं। पत्रकार सोमा देवांगन ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि एक पत्रकार के रूप में उनका काम है खबरों को कवर करना, लेकिन सच्चाई दिखाने पर उन्हें धमकाया जा रहा है।

इस मामले में भीम आर्मी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोमा देवांगन के समर्थन में आवाज उठाई है। भीम आर्मी ने चेतावनी दी है कि यदि धमकी देने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई तो वे बड़े आंदोलन का आयोजन करेंगे। समर्थकों का कहना है कि सोमा देवांगन छत्तीसगढ़ की वास्तविक समस्याओं पर निष्पक्ष रिपोर्टिंग करती हैं।

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अनूठा कोण: डिजिटल युग में महिला पत्रकारों की चुनौती

यह मामला डिजिटल मीडिया में काम करने वाली महिला पत्रकारों की बढ़ती चुनौतियों को उजागर करता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए मिलने वाली धमकियों का तुरंत असर होता है और ये धमकियां अक्सर जातिगत और लैंगिक भेदभाव से भरी होती हैं। Mirror Chhattisgarh जैसे डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म की पत्रकार होने के नाते सोमा देवांगन के पास पारंपरिक मीडिया संस्थानों जैसी सुरक्षा व्यवस्था नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता की आजादी को लेकर बढ़ती चिंताएं इस बात का प्रमाण हैं कि सच्चाई दिखाने वाले मीडियाकर्मियों को व्यवस्थित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। महिला सुरक्षा पर रिपोर्टिंग करने वाली पत्रकार को ही असुरक्षित महसूस करना पड़े, यह स्थिति कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

सोमा देवांगन ने स्पष्ट किया है कि वे अपने पत्रकारिता के काम को बंद नहीं करेंगी और यदि पुलिस उचित कार्रवाई नहीं करती तो वे आगे की कानूनी कार्रवाई करने को मजबूर होंगी। यह मामला न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा का सवाल है बल्कि मीडिया की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का भी मुद्दा बन गया है।

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