काठमांडू में सोमवार को हजारों युवा प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर व्यापक प्रदर्शन किया, जिसे स्थानीय मीडिया “Gen Z Protests का नाम दे रहा है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सरकार द्वारा प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाए गए प्रतिबंध और व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब हिंसक रूप ले चुका है।
8 सितंबर 2025 को काठमांडू में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 42 लोग घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरियरों को तोड़कर संसद भवन में घुसने का प्रयास किया और भवन के कुछ हिस्सों में आग लगा दी। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस, वॉटर कैनन और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार इस हिंसा में 5 लोगों की मृत्यु भी हुई है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी भी बाकी है। घायलों में दो पत्रकार भी शामिल हैं।
बिगड़ती स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने कड़े कदम उठाए हैं। काठमांडू के प्रमुख क्षेत्रों में दिन भर कर्फ्यू लगाया गया है, जिसमें संसद भवन, राष्ट्रपति निवास और सिंहा दरबार (प्रधानमंत्री कार्यालय) के आसपास के इलाके शामिल हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शूट एट साइट के आदेश भी जारी किए गए हैं। कर्फ्यू सोमवार रात 10 बजे तक लागू रहने की घोषणा की गई थी।
इस व्यापक प्रदर्शन की तत्काल वजह 6 सितंबर 2025 को शुक्रवार को लागू किया गया सोशल मीडिया प्रतिबंध है। नेपाली सरकार ने 26 प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया है, जिनमें फेसबुक, यूट्यूब, एक्स (पूर्व में ट्विटर), इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और वीचैट शामिल हैं। यह प्रतिबंध इसलिए लगाया गया क्योंकि इन प्लेटफॉर्म ने नेपाली सरकार के नए नियमों का पालन नहीं किया, जिसके तहत उन्हें नेपाली सरकार के साथ पंजीकरण कराना और स्थानीय कार्यालय स्थापित करना था।
हालांकि सोशल मीडिया प्रतिबंध ने प्रदर्शनों को तत्काल ट्रिगर किया है, लेकिन प्रदर्शनकारी स्पष्ट करते हैं कि उनकी शिकायतें इससे कहीं व्यापक हैं। 24 वर्षीय छात्र युजन राजभंडारी ने कहा, “हम सोशल मीडिया प्रतिबंध से परेशान थे लेकिन यह एकमात्र कारण नहीं है कि हम यहां एकत्रित हुए हैं। हम नेपाल में संस्थागत भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं”। 20 वर्षीय प्रदर्शनकारी इक्षमा तुमरोक ने कहा, “हम बदलाव देखना चाहते हैं। दूसरों ने इसे सहा है, लेकिन इसे हमारी पीढ़ी के साथ समाप्त होना चाहिए”।
प्रदर्शनकारियों के मुख्य मुद्दों में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व में व्याप्त सरकारी भ्रष्टाचार और वर्तमान प्रशासन का तानाशाही रवैया शामिल है। युवा पीढ़ी इस संस्थागत भ्रष्टाचार को समाप्त करना चाहती है।
प्रदर्शन काठमांडू तक सीमित नहीं हैं बल्कि नेपाल के अन्य शहरों में भी समान प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। इस आंदोलन ने टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से गति पकड़ी है, जो अभी भी सुलभ है क्योंकि इसने पहले से ही सरकारी नियमों का अनुपालन किया था। यह डिजिटल राइट्स एक्टिविज्म और व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी भावना का संयोजन है।
नेपाल में बिगड़ती स्थिति से पड़ोसी देश भारत और चीन भी चिंतित हैं। यह हिंसक प्रदर्शन दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है। नेपाल के युवाओं का यह आंदोलन लोकतांत्रिक मूल्यों और डिजिटल अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण संघर्ष का प्रतिनिधित्व करता है।
वर्तमान अशांति नेपाल के हाल के इतिहास में युवाओं के नेतृत्व में सबसे महत्वपूर्ण आंदोलनों में से एक का प्रतिनिधित्व करती है। यह आंदोलन न केवल सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ है बल्कि देश की युवा पीढ़ी में व्याप्त भ्रष्टाचार विरोधी भावना का भी प्रतिबिंब है। सरकार की प्रतिक्रिया और आने वाले दिनों में स्थिति कैसे विकसित होती है, यह नेपाल के राजनीतिक भविष्य को आकार देगा।
यह घटना दिखाती है कि आज की डिजिटल युग में युवा पीढ़ी अपने अधिकारों के लिए कितनी सक्रिय है और वे सरकारी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर कैसे आवाज उठा सकते हैं। नेपाल की इस स्थिति का समाधान केवल बल प्रयोग से नहीं बल्कि युवाओं की वैध मांगों को सुनकर ही हो सकता है।