वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में New income tax bill (संख्या 2), 2025 पेश किया, जो बिना किसी बहस के पारित हो गया। यह बिल भारत के 63 साल पुराने आयकर अधिनियम, 1961 को बदलने के लिए लाया गया है, जो देश के टैक्स ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
बिल वापस लेने की वजह और नया मसौदा
सरकार ने पहले फरवरी 2025 में पेश किया गया आयकर बिल पिछले सप्ताह औपचारिक रूप से वापस ले लिया था। इसकी मुख्य वजह भाजपा सांसद बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली संसदीय चयन समिति के 285 व्यापक सुझाव थे। चार महीने की विस्तृत समीक्षा के बाद समिति ने 4,500 पन्नों की रिपोर्ट में कई अहम बदलाव सुझाए थे।
S.I.M.P.L.E के सिद्धांत पर आधारित नया बिल
नए आयकर विधेयक को S.I.M.P.L.E के सिद्धांतों पर तैयार किया गया है:
- S – Streamlined structure and language (सुव्यवस्थित संरचना और भाषा)
- I – Integrated and concise (एकीकृत और संक्षिप्त)
- M – Minimised litigation (न्यूनतम मुकदमेबाजी)
- P – Practical and transparent (व्यावहारिक और पारदर्शी)
- L – Learn and adapt (सीखें और अनुकूलित करें)
- E – Efficient tax reforms (कुशल टैक्स सुधार)
नए बिल की मुख्य विशेषताएं
संरचनात्मक बदलाव:
- नया बिल 536 धाराओं और 16 शेड्यूल में सुव्यवस्थित रूप से तैयार किया गया है
- पुराने कानून से 1,200 प्रावधान और 900 स्पष्टीकरण हटाए गए हैं
- भाषा को लगभग 50 प्रतिशत तक सरल बनाया गया है
टैक्स वर्ष की नई अवधारणा:
- ‘पिछला वर्ष’ और ‘मूल्यांकन वर्ष’ की जगह अब ‘टैक्स वर्ष’ का एकीकृत कॉन्सेप्ट होगा
- इससे टैक्सपेयर्स के लिए समझना आसान हो जाएगा
10 प्रमुख बदलाव जो टैक्सपेयर्स को प्रभावित करेंगे
1. रिफंड संबंधी राहत:
2. शून्य-TDS प्रमाणपत्र:
3. गृह संपत्ति संबंधी स्पष्टता:
- खाली मकान पर डीम्ड रेंट टैक्स से राहत मिलेगी
- गृह संपत्ति पर 30% कटौती की स्पष्ट परिभाषा दी गई है
- किराए की संपत्ति पर होम लोन के ब्याज में कटौती की सुविधा
4. TDS दावों की समयसीमा:
5. MSME की परिभाषा:
बदलाव की मुख्य वजहें
जटिलता की समस्या:
1961 के इनकम टैक्स अधिनियम में 4,000 से ज्यादा संशोधन हो चुके थे और इसमें 5 लाख से ज्यादा शब्द थे। यह आम करदाताओं के लिए बहुत जटिल हो गया था।
डिजिटल युग की आवश्यकता:
पुराना कानून डिजिटल युग के अनुरूप नहीं था। नए बिल में CBDT को अधिक अधिकार दिए गए हैं, जो पहले सीमित थे।
मुकदमेबाजी की समस्या:
पुराने कानून में विरोधाभासी प्रावधानों के कारण अधिक मुकदमेबाजी होती थी। नए बिल में गैर-जरूरी और विरोधाभासी प्रावधानों को हटाकर मुकदमों में कमी लाने की कोशिश की गई है।
नए आयकर बिल 2025 के फायदे और नुकसान – तुलनात्मक तालिका
श्रेणी | फायदे (Pros) | नुकसान (Cons) |
---|---|---|
करदाताओं के लिए | – सरल भाषा और आसान समझ – कम मुकदमेबाजी और तेज़ प्रक्रिया – डिजिटल अनुकूलता से बेहतर सेवा – स्पष्ट नियम और कम भ्रम – समय की बचत और कम अनुपालन लागत | – नए नियमों को समझने में समय लगेगा – CA और टैक्स सलाहकारों को नई ट्रेनिंग की आवश्यकता – कुछ नियमों की व्याख्या अभी स्पष्ट नहीं |
सरकार के लिए | – बेहतर टैक्स कलेक्शन और कम चोरी – प्रशासनिक लागत में कमी – पारदर्शिता में वृद्धि – अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप | – राज्य सरकारों के साथ समन्वय की आवश्यकता – सॉफ्टवेयर अपडेट की लागत – न्यायालयी फैसलों का इंतजार |
व्यापारियों और MSME के लिए | – अनावश्यक मुकदमेबाजी से राहत – स्पष्ट दिशा-निर्देश से बेहतर योजना – तेज़ रिफंड प्रक्रिया | – छोटे व्यापारियों को नई प्रक्रिया सीखने में कठिनाई – पुराने रिकॉर्ड के साथ तालमेल की चुनौती – पुराने केसों का निपटारा जटिल हो सकता है |
यह तालिका नए आयकर बिल 2025 के मुख्य फायदों और नुकसानों को विभिन्न हितधारकों के लिए स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जिससे प्रत्येक समूह पर इसके प्रभाव को समझना आसान हो जाता है।
टैक्सपेयर्स पर प्रभाव
नया बिल मध्यम वर्गीय करदाताओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जा रहा है। व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स और MSME को सबसे अधिक लाभ होगा क्योंकि उन्हें अनावश्यक कानूनी उलझनों से बचने में मदद मिलेगी।
रिफंड प्रक्रिया में सुधार से उन लोगों को विशेष राहत मिलेगी जो देर से रिटर्न भरते हैं। शून्य-TDS सर्टिफिकेट की सुविधा से कम आय वाले लोगों को अनावश्यक TDS कटौती से बचने में मदद मिलेगी।
भविष्य की संभावनाएं
नया आयकर बिल 2025 भारत के टैक्स सिस्टम को 21वीं सदी के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल करदाताओं के लिए प्रक्रिया को सरल बनाएगा बल्कि सरकारी राजस्व में भी वृद्धि करने में सहायक होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल अनुपालन को आसान बनाएगा, मुकदमेबाजी कम करेगा और करदाताओं को अपने वित्त की योजना बनाने में अधिक स्पष्टता देगा। हालांकि प्रारंभिक अनुकूलन में कुछ चुनौतियां हो सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक रूप से यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक साबित होगा।