छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सड़क सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह ने 26 अगस्त 2025 से “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” अभियान की शुरुआत करते हुए एक सख्त आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार दुर्ग-भिलाई सहित पूरे जिले में बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालकों को किसी भी पेट्रोल पंप से ईंधन नहीं दिया जाएगा।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2003 की धारा 163 के तहत जारी किए गए इस आदेश का मुख्य उद्देश्य जिले में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर रोकथाम लगाना है। पिछले छह महीनों में हुए आंकड़े चौंकाने वाले हैं – 130 सड़क दुर्घटनाओं में हेलमेट नहीं पहनने के कारण 132 दोपहिया वाहन चालकों और सवारियों की मौत हो गई है। इन दुखद घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने यह कड़ा कदम उठाया है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने आदेश जारी करते समय स्पष्ट किया है कि यह फैसला पूर्णतः जनहित में लिया गया है। उन्होंने कहा कि दोपहिया वाहन चालक अपनी लापरवाही के शिकार न बनें, इसके लिए यह कड़ा निर्णय आवश्यक था। जिले के सभी पेट्रोल पंप संचालकों को इस आदेश का सख्ती से पालन करना होगा, अन्यथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उनका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है।
आदेश के तहत सभी पेट्रोल पंप संचालकों को अपने परिसर में “नो हेलमेट, नो पेट्रोल” का बोर्ड या पोस्टर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह व्यवस्था दोपहिया वाहन चालकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई है ताकि वे अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट पहनने की आदत डालें।
हालांकि यह नियम सख्त है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में राहत प्रदान की गई है। आपातकालीन सेवाओं, मेडिकल इमरजेंसी के दौरान और धार्मिक कारणों से पगड़ी पहनने वाले व्यक्तियों को इस नियम से छूट दी गई है। यह व्यवस्था मानवीय आधार पर की गई है ताकि आपातकालीन स्थितियों में लोगों को परेशानी न हो।
दुर्ग जिले के विभिन्न थानों में हुई दुर्घटनाओं के आंकड़े इस नए नियम की आवश्यकता को स्पष्ट करते हैं। धमधा में 9 दुर्घटनाओं में 9 मौतें, खुर्सीपार में 4 दुर्घटनाओं में 4 मौतें, बोरी में 7 दुर्घटनाओं में 8 मौतें, कुम्हारी में 7 दुर्घटनाओं में 7 मौतें, मोहन नगर में 4 दुर्घटनाओं में 4 मौतें, भिलाई नगर में 6 दुर्घटनाओं में 6 मौतें हुई हैं। इसी प्रकार पाटन, पद्मनाभपुर, पुरानी भिलाई, पुलगांव, सुपेला, उतई, छावनी, दुर्ग, वैशाली नगर, जामुल, जामगांव आर, नंदनी, नेवई, अंडा और अमलेश्वर थानों में भी अनेक घातक दुर्घटनाएं हुई हैं।
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इस नए नियम का व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां यह आदेश नागरिक सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और लाभकारी है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल पंप संचालकों के मध्य बिक्री में कमी को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। कई पंप संचालकों का मानना है कि शुरुआती दिनों में उनकी बिक्री प्रभावित हो सकती है, जब तक लोग इस नए नियम के साथ तालमेल नहीं बिठा लेते।
यह पहली बार नहीं है जब दुर्ग प्रशासन ने हेलमेट के संबंध में सख्त कदम उठाया है। पूर्व में भी प्रशासन द्वारा हेलमेट न पहनने वाले व्यक्तियों को पेट्रोल न देने का आदेश दिया गया था, लेकिन इस बार इसे और भी सख्ती के साथ लागू किया गया है।
यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम निश्चित रूप से सड़क सुरक्षा में सुधार लाएगा। हेलमेट पहनना न केवल कानूनी आवश्यकता है बल्कि यह जीवन रक्षक भी है। सिर की चोटों से होने वाली मौतों में काफी कमी आने की संभावना है यदि यह नियम प्रभावी रूप से लागू हो जाए।
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सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा है कि यह दुर्ग जिले के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यदि यह अभियान सफल रहता है तो राज्य के अन्य जिलों में भी इसे लागू किया जा सकता है।
हालांकि कुछ आलोचकों का मानना है कि पेट्रोल पंप कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी डालना उचित नहीं है, लेकिन प्रशासन का स्पष्ट मत है कि सामुदायिक सहयोग के बिना यातायात नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं है।
इस आदेश का तत्काल प्रभाव दिखाई दे रहा है। 26 अगस्त से ही पेट्रोल पंपों पर हेलमेट पहनने वालों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। कई दुकानदारों ने बताया कि हेलमेट की बिक्री में अचानक तेजी आई है, जो इस नीति की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल दुर्घटनाओं को कम करेगी बल्कि लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगी। यह एक व्यापक सामाजिक बदलाव की शुरुआत हो सकती है जहां सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।