NMDC की स्लरी पाइपलाइन कंस्ट्रक्शन साइट पर अनियंत्रित गड्ढे में डूबकर 11 साल के स्कूली बच्चे की दर्दनाक मौत, बहन को लोगों ने बचाया

दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़), 29 जुलाई 2025:
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के गीदम थाना क्षेत्र के हाऊरनार ग्राम में आज एक दर्दनाक घटना घटी, जिसने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि पूरे गाँव को झकझोर कर रख दिया। सुबह स्कूल से लौटते समय दो भाई-बहन NMDC (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) द्वारा स्लरी (खनिज अपद्रव्य) पाइपलाइन के निर्माण के लिए खोदे गए करीब 10 फीट गहरे, खुले व पानी से भरे गड्ढे में गिर गए। लड़की को तो राहगीरों की सतर्कता से बचा लिया गया, लेकिन उसके 11 वर्षीय भाई की जान नहीं बच सकी। घटना के बाद ग्रामीणों में गुस्सा और आक्रोश फैल गया, जिसमें NMDC और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए।

ग्रामीणों का कहना है कि गड्ढा खोदने के बाद उस पर किसी तरह का बाड़ लगाने या चेतावनी का बोर्ड लगाने का प्रबंध नहीं किया गया था, जिससे यह बच्चों सहित राहगियों के लिए जानलेवा साबित हुआ। स्थानीय निवासियों ने बताया कि अगर कंपनी और प्रशासन समय रहते सुरक्षा के उचित इंतजाम करते, तो यह दुर्घटना नहीं होती। घटना के बाद ग्रामीणों ने सड़कों पर उतरकर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस तरह के निर्माण स्थलों की नियमित जांच हो, सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य बनाया जाए और प्रभावित परिवार को तुरंत मुआवजा दिया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनी के पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्यों निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की सख्ती से पालना नहीं होती? क्यों बार-बार लापरवाही से अनावश्यक मौतें हो रही हैं? आम जनता की सुरक्षा के प्रति प्रशासन और कंपनियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने घटना स्थल का निरीक्षण किए जाने और एक स्वतंत्र जांच की भी मांग की है। उन्होंने कहा है कि इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए सरकार को सख्त नियम बनाने होंगे। जिस तरह से इस घटना के बाद मीडिया, सिविल सोसाइटी और राजनीतिक दल भी सवाल उठा रहे हैं, वह दर्शाता है कि अब जनता बेहतर सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रही है।

अभी तक NMDC या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे ग्रामीणों का धैर्य टूट रहा है। बच्चे के माता-पिता और परिवार के लोगों का दर्द बयां करना मुश्किल है। उन्हें न्याय मिले, इसके लिए सरकारी स्तर पर त्वरित कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है। कुल मिलाकर, यह घटना लापरवाही, सुरक्षा उपायों की अनदेखी और प्रशासनिक जवाबदेही की कमी का दुखद उदाहरण है। आने वाले दिनों में अगर ऐसे मामलों में तुरंत जांच, कार्रवाई और सुधारात्मक उपाय किए जाएं, तो ही टिकेश्वर जैसे मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकती है। यह घटना समाज, कंपनियों और प्रशासन के लिए एक सबक साबित हो, यही सबकी उम्मीद है।

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