छत्तीसगढ़ में शिक्षा जगत की एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य के हजारों छात्र-छात्राओं के लिए राहत की बात यह है कि इस बार बीए-बीएड और बीएससी-बीएड कोर्स में दाखिले के लिए कोई प्रवेश परीक्षा आयोजित नहीं होगी। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।
व्यापम की असमर्थता के कारण बदला नियम
सत्र 2025-26 के लिए बीए-बीएड और बीएससी-बीएड कोर्स में प्रवेश की नीति में यह बदलाव छत्तीसगढ़ व्यापम की असमर्थता के कारण लिया गया है। व्यापम द्वारा परीक्षा आयोजित करने में असमर्थता जाहिर करने के बाद शिक्षा विभाग ने इस निर्णय को अंतिम रूप दिया है। यह निर्णय केवल वर्तमान सत्र के लिए लिया गया है और आने वाले वर्षों में नियमित प्रवेश परीक्षा की व्यवस्था बहाल हो सकती है।
मेरिट आधारित प्रवेश प्रक्रिया
नई व्यवस्था के अनुसार, अब छात्रों को कक्षा 12वीं में प्राप्त अंकों की मेरिट के आधार पर काउंसलिंग के जरिए एडमिशन मिलेगा। यह प्रक्रिया उन हजारों छात्रों के लिए राहत की बात है जो हर साल इस कठिन प्रवेश परीक्षा की तैयारी में महीनों का समय बिताते हैं। इस बार उन्हें किसी भी प्रकार की परीक्षा से नहीं गुजरना पड़ेगा और सीधे मेरिट के आधार पर सिलेक्शन होकर दाखिला मिल जाएगा।
राज्य में 250 से अधिक सीटों का लाभ
छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख कॉलेजों में बीए-बीएड और बीएससी-बीएड कोर्स की कुल 250 से अधिक सीटें उपलब्ध हैं। इस बार इन सभी सीटों पर मेरिट के आधार पर एडमिशन होगा। शिक्षक प्रशिक्षण के ये इंटीग्रेटेड कोर्स छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय हैं क्योंकि ये स्नातक डिग्री के साथ-साथ शिक्षक प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं।
छात्रों के लिए सुनहरा अवसर
यह निर्णय उन छात्रों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जो 12वीं कक्षा में अच्छे अंक प्राप्त किए हैं लेकिन प्रवेश परीक्षा की तैयारी में पिछड़ गए हैं। अब वे अपने बारहवीं के प्रदर्शन के आधार पर सीधे इन प्रतिष्ठित शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रवेश पा सकेंगे। यह व्यवस्था ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए भी लाभकारी है जो महंगी कोचिंग की व्यवस्था नहीं कर सकते।
शिक्षा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव
इस निर्णय को छत्तीसगढ़ की शिक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। पारंपरिक रूप से इन कोर्सों में प्रवेश के लिए छत्तीसगढ़ व्यापम द्वारा आयोजित प्री बीए-बीएड और प्री बीएससी-बीएड प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ती थी। ये परीक्षाएं अत्यधिक प्रतिस्पर्धी होती हैं और हजारों छात्र इनमें भाग लेते हैं।
काउंसलिंग प्रक्रिया का महत्व
मेरिट आधारित प्रवेश व्यवस्था में काउंसलिंग प्रक्रिया की भूमिका अहम होगी। छात्रों को अपने 12वीं के अंकों के आधार पर तैयार की गई मेरिट लिस्ट के अनुसार काउंसलिंग में भाग लेना होगा। इस प्रक्रिया में सीट एलॉकेशन उनकी मेरिट रैंकिंग, पसंदीदा कॉलेज की वरीयता और उपलब्ध सीटों के आधार पर होगी।
आरक्षण नीति का अनुपालन
नई प्रवेश नीति में भी राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पूरा अनुपालन किया जाएगा। सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को उनके लिए निर्धारित कोटे के अनुसार सीटें आवंटित की जाएंगी। यह सुनिश्चित करेगा कि सभी वर्गों के छात्रों को समान अवसर मिले।
भविष्य की संभावनाएं
हालांकि यह व्यवस्था केवल सत्र 2025-26 के लिए है, लेकिन इसके परिणामों के आधार पर भविष्य में भी इस तरह की नीति अपनाई जा सकती है। यदि मेरिट आधारित प्रवेश से बेहतर परिणाम आते हैं और गुणवत्तापूर्ण छात्र मिलते हैं, तो सरकार इसे स्थायी व्यवस्था के रूप में भी लागू कर सकती है
शैक्षिक संस्थानों की तैयारी
इस नई व्यवस्था के तहत राज्य के चार कॉलेजों को अपनी प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव करना होगा। उन्हें काउंसलिंग व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि मेरिट आधारित चयन में पूरी पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही दस्तावेज वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी सुव्यवस्थित करनी होगी।
छात्रों के लिए सुझाव
इस नई व्यवस्था के तहत छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने 12वीं के मार्कशीट और अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें। काउंसलिंग प्रक्रिया की तारीखों और आवश्यक दस्तावेजों की सूची के लिए नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइटों की जांच करते रहें।
यह निर्णय छत्तीसगढ़ के शिक्षा क्षेत्र में एक नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है और हजारों छात्रों के शैक्षिक सपनों को साकार करने में सहायक होगा।