रायपुर: चार दिन से जल संकट, नाराज नागरिकों ने जोन कमिश्नर को घेरा

रायपुर, 5 अगस्त। राजधानी रायपुर के सुंदर नगर और इसके आसपास के पांच वार्डों में पिछले चार दिनों से जल आपूर्ति पूरी तरह ठप होने से स्थानीय निवासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पीने के पानी से लेकर दैनिक घरेलू कामकाज तक प्रभावित होने से परेशान नागरिकों ने सोमवार को जोन-5 के कमिश्नर का घेराव कर अपनी समस्याओं को लेकर कड़ा विरोध जताया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल समाधान की मांग वाला ज्ञापन सौंपा।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि गत शुक्रवार से ही इलाके में जल आपूर्ति की व्यवस्था चरमरा गई है। लगातार चार दिनों तक पानी की एक बूंद भी नहीं मिलने से घर-घर में संकट की स्थिति बन गई है। महिलाओं को पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है, वहीं बुजुर्गों और बच्चों की स्थिति और भी गंभीर हो गई है। स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

क्षेत्रीय निवासी राजकुमार वर्मा का कहना है, “चार दिन से घर में पानी की एक बूंद नहीं आई है। बच्चे प्यासे हैं, खाना नहीं बन पा रहा और साफ-सफाई भी नहीं हो पा रही। प्रशासन की यह लापरवाही बर्दाश्त के बाहर है।” इसी तरह स्थानीय महिला सुनीता देवी ने बताया कि पानी लाने के लिए दो-तीन किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है और कई बार वहां भी पानी नहीं मिलता।

सोमवार की सुबह जब स्थिति और गंभीर हो गई तो क्षेत्र के सैकड़ों लोग एकजुट होकर जोन-5 कमिश्नर के कार्यालय पहुंचे। नारेबाजी करते हुए लोगों ने कमिश्नर को घेर लिया और अपनी समस्याओं को विस्तार से बताया। इस दौरान भीड़ में मौजूद लोगों ने कहा कि यदि 24 घंटे में जल आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे और कड़े आंदोलन को मजबूर होंगे।

प्रदर्शनकारियों ने जोन कमिश्नर को सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से लिखा है कि जल आपूर्ति की यह समस्या केवल तकनीकी नहीं बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए स्थायी समाधान किया जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है।

जोन-5 कमिश्नर ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया है कि समस्या की तत्काल जांच कराई जाएगी और जल्द से जल्द पानी की आपूर्ति बहाल की जाएगी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। यह घटना राजधानी की बुनियादी सुविधाओं की हालत और प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों को स्पष्ट रूप से उजागर करती है। नागरिकों की इस तरह की मजबूरी किसी भी विकसित शहर के लिए शर्मनाक स्थिति है।

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