Paracetamol medicine scandal in Chhattisgarh: गुणवत्ता में खामी के बाद कंपनी पर सरकारी कार्रवाई,  CGMSCLका सख्त नोटिस

A prescription medicine bottle tipped over with white tablets spilling out onto a dark gray surface. The orange plastic pill bottle has a white child-resistant cap lying beside it, and approximately 20-25 round white tablets are scattered around the opening of the bottle.

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है जो पूरे राज्य की दवा आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में व्यापक रूप से उपयोग होने वाली Paracetamol टैबलेट्स की गुणवत्ता में गंभीर खामियां मिली हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने तत्काल कार्रवाई करते हुए महासमुंद स्थित 9M इंडिया लिमिटेड कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में निर्मित Paracetamol 500 एमजी और 650 एमजी टैबलेट्स की विभिन्न बैचों में गुणवत्ता संबंधी गंभीर समस्याएं पाई गई हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि इन दवाओं पर काले धब्बे मौजूद हैं, जो इन्हें मरीजों के उपयोग के लिए पूर्णतः अनुपयुक्त बनाते हैं। यह स्थिति न केवल चिकित्सा मानकों का उल्लंघन है बल्कि मरीजों की सेहत के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती है।

दवा गोदामों और राज्यभर की स्वास्थ्य इकाइयों से आई शिकायतों के बाद यह पूरा मामला उजागर हुआ है। फील्ड स्टाफ और मेडिकल ऑफिसर्स की रिपोर्ट्स में लगातार यह बात सामने आ रही थी कि Paracetamol की टैबलेट्स में विकृति दिखाई दे रही है। इसके बाद CGMSCL ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संदिग्ध बैचों की व्यापक जांच का आदेश दिया।

सरकारी जांच में खुली पोल

निगम द्वारा कराई गई विस्तृत जांच में यह पुष्टि हो गई कि 9M इंडिया लिमिटेड द्वारा सप्लाई की गई दवाओं में गुणवत्ता की कमी है। लैब रिपोर्ट्स में स्पष्ट रूप से यह सामने आया कि टैबलेट्स पर मौजूद काले धब्बे मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में हुई गड़बड़ी का नतीजा हैं। यह न केवल दवा की प्रभावशीलता को कम करता है बल्कि मरीजों के लिए साइड इफेक्ट्स का कारण भी बन सकता है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए CGMSCL ने कंपनी को तत्काल आदेश जारी किया है कि सभी संदिग्ध बैच को दवा गोदामों और स्वास्थ्य संस्थानों से तुरंत वापस लिया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि कंपनी को गुणवत्तापूर्ण नई दवाओं की खेप उपलब्ध करानी होगी। निगम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर कंपनी ने आवश्यक कार्रवाई नहीं की तो निविदा नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री का सख्त रुख

इस पूरे मामले पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार नागरिकों की सेहत के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने विस्तार से बताया कि दवाओं की आपूर्ति से पहले एक व्यापक जांच प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके तहत कंपनियों से प्राप्त दवाओं के रैंडम सैंपल लेकर देश की प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं में भेजे जाते हैं।

मंत्री ने बताया कि कोलकाता, दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों की राष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं में जांच के बाद जब क्लीयरेंस रिपोर्ट आती है तभी दवाओं का वितरण शुरू किया जाता है। लेकिन इसके बावजूद यदि किसी दवा की गुणवत्ता को लेकर शिकायत मिलती है तो तत्काल उस बैच को रोककर पुनः जांच कराई जाती है।

ब्लैकलिस्टिंग की चेतावनी

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कंपनी के खिलाफ लगातार तीन बार गुणवत्ता संबंधी शिकायतें आती हैं तो ऐसी कंपनियों को राज्य की ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाता है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई कंपनियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की गई है और भविष्य में भी यह नीति जारी रहेगी।

व्यापक प्रभाव और चिंताएं

  • Paracetamol राज्य भर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दवा है
  • बुखार और दर्द के इलाज में यह प्राथमिक दवा मानी जाती है
  • ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी मांग सबसे अधिक रहती है
  • गुणवत्ता की कमी से मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर हो सकता है
  • दवा आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं

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सरकार के सुधारात्मक उपाय

इस घटना के बाद प्रदेश सरकार ने दवा गुणवत्ता नियंत्रण में और भी सख्ती बरतने का संकेत दिया है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में जांच प्रक्रिया को और भी पारदर्शी और सख्त बनाया जाएगा। साथ ही कंपनियों के लिए गुणवत्ता मापदंडों को और भी कड़ा किया जाएगा।

मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि सरकार मरीजों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है। समय रहते इस समस्या को पकड़कर और तत्काल कार्रवाई करके सरकार ने एक बड़ी दुर्घटना को टालने का काम किया है। यदि ये दवाएं मरीजों तक पहुंच जातीं तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती थीं।

भविष्य की रणनीति

अब प्रदेश सरकार दवा आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए कई नए कदम उठाने की तैयारी में है। इसमें रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, बेहतर क्वालिटी चेक प्रोसेस, और कंपनियों की नियमित ऑडिटिंग शामिल है। साथ ही दवा गोदामों में भंडारण की बेहतर व्यवस्था भी की जाएगी।

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है कि दवा की गुणवत्ता पर निरंतर निगरानी कितनी आवश्यक है। सरकार का तत्काल और सख्त रुख इस बात का प्रमाण है कि प्रदेशवासियों की सेहत से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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