छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला जेल से चार बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के आरोपी फरार, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में शनिवार दोपहर एक गंभीर घटना सामने आई है जब जिला जेल से चार विचाराधीन कैदी फरार हो गए। यह सभी कैदी बलात्कार और बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के गंभीर मामलों में विचाराधीन थे। इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फरार होने वाले चारों आरोपियों की पहचान दशरथ सिदार (19 वर्ष), चंद्रशेखर रठिया (20 वर्ष), राजा कंवर (22 वर्ष) और सरना सिंकू (26 वर्ष) के रूप में की गई है। इनमें से तीन आरोपी दशरथ सिदार, राजा कंवर और सरना सिंकू कोरबा जिले के मूल निवासी हैं, जबकि चंद्रशेखर रठिया पड़ोसी रायगढ़ जिले का रहने वाला है।

जेल से फरारी की घटना शनिवार दोपहर 3 बजे से 4 बजे के बीच हुई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इन चारों कैदियों ने जेल परिसर के अंदर स्थित गौशाला की दीवार पर रस्सी की सहायता से चढ़कर फरार होने में सफलता पाई। यह घटना जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक को दर्शाती है, खासकर तब जब ये सभी कैदी गंभीर अपराधों के आरोपी थे।

छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि फरार हुए सभी चार आरोपी बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में विचाराधीन थे। पॉक्सो एक्ट भारत में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने वाला एक महत्वपूर्ण कानून है, जो 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करता है।

इस घटना के तुरंत बाद कोरबा पुलिस प्रशासन ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया है। पुलिस की विशेष टीमें गठित की गई हैं जो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर रही हैं। स्थानीय पुलिस अधीक्षक ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही सभी फरार कैदियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

जेल प्रशासन की ओर से भी इस घटना की जांच शुरू की गई है। जेल अधीक्षक ने बताया कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर कैसे ये चारों कैदी जेल की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर फरार होने में सफल रहे। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि कैदियों ने पहले से ही रस्सी का इंतजाम किया था और गौशाला की दीवार का सहारा लेकर जेल की बाहरी दीवार तक पहुंचने में कामयाब रहे।

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जेल सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के आदेश दिए हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जेल की सुरक्षा में हुई इस चूक की पूरी जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना छत्तीसगढ़ की जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। राज्य में पहले भी कई बार जेलों से कैदियों के फरार होने की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन इस बार मामला और भी गंभीर है क्योंकि फरार हुए सभी कैदी यौन अपराधों के आरोपी हैं जो समाज के लिए खतरनाक हो सकते हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। विधायकों ने कहा है कि जेल प्रशासन की लापरवाही के कारण समाज में अशांति फैल सकती है और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने मांग की है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जेलों में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बलात्कार और पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर अपराधों के आरोपी कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था और सख्त होनी चाहिए क्योंकि ये समाज के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जेल सुधार कार्यक्रम को तेजी से लागू किया जाए।

पुलिस प्रशासन ने जनता से अपील की है कि यदि किसी को इन फरार कैदियों की कोई जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करे। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि इन आरोपियों को छुपाने की कोशिश करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना के बाद कोरबा जिले की जेल में सुरक्षा व्यवस्था को और भी मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए हैं। जेल प्रशासन ने सभी बैरकों और सुरक्षा चौकियों की जांच कराई है और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ाई गई है। साथ ही जेल के सभी कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

यह घटना न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की जेल सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में आधुनिक तकनीक का उपयोग करके सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना आज के समय की मांग है।

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