“हिंदी नहीं आती” कहकर पुलिस ने मदद से किया इनकार, अस्पताल स्टाफ पर भेदभाव का आरोप
भिलाई से पुरी घूमने गए 25 साल के मुकेश गुप्ता की समुद्र में डूबने से मौत हो गई। लेकिन असली सदमा तब लगा जब अस्पताल और पुलिस ने परिवार के साथ छुआछूत जैसा व्यवहार किया।
क्या है पूरा मामला?
रुआबांधा, भिलाई के रहने वाले मुकेश गुप्ता शनिवार को अपने दोस्तों के साथ पुरी घूमने निकले थे। रविवार सुबह 8 बजे पुरी पहुंचकर वे समुद्री किनारे गए। वहां तेज धारा में फंसकर मुकेश डूबने लगे।
एक दोस्त ने जान की बाजी लगाकर उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और हालत गंभीर थी।
अस्पताल में हुआ भेदभाव
मृतक के भाई का सबसे बड़ा आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने उनके साथ छुआछूत जैसा व्यवहार किया। उनका कहना है कि तुरंत इलाज नहीं किया गया और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया। जरूरी समय पर मदद नहीं मिली और देरी के बाद अस्पताल ने मुकेश को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने “हिंदी नहीं आती” कहकर छोड़े हाथ
जब परिवार पुलिस के पास न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचा तो वहां भी निराशा ही हाथ लगी। पुलिस ने FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया और “मुझे हिंदी नहीं आती” कहकर मदद से हाथ खड़े कर लिए। उन्होंने परिवार को ओड़िया में रिपोर्ट लिखने को कहा और यहां तक धमकी दी कि वह जगह प्रतिबंधित थी।
सुरक्षा व्यवस्था का पोल खुला
हैरानी की बात – घटनास्थल पर हजारों लोग मौजूद थे लेकिन:
- कोई कोस्ट गार्ड नहीं दिखा
- पुलिस गायब थी
- चेतावनी के बोर्ड तक नहीं लगे थे
- सुरक्षा का नामोनिशान नहीं था
परिवार की आंखों में आंसू
मुकेश के भाई और परिवारजन रो-रोकर कह रहे हैं – “हमारे साथ इंसान जैसा व्यवहार नहीं किया गया। जैसे हम कोई अछूत हों।”
क्या यही होगा हिंदी का हाल?
यह घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है – क्या हर राज्य में हिंदी भाषियों के साथ ऐसा ही होगा? कहीं ओडिशा भी महाराष्ट्र जैसा तो नहीं बन जाएगा जहां भाषा के नाम पर भेदभाव हो?
इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।
स्थान: रुआबांधा, भिलाई, छत्तीसगढ़