मैनचेस्टर, 24 जुलाई 2025 – भारतीय क्रिकेट टीम के उप-कप्तान और विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने ओल्ड ट्रैफर्ड में इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट मैच में अपने साहस और टीम स्पिरिट का अनुपम उदाहरण पेश किया है। पैर की हड्डी टूटने के बावजूद मैदान में वापसी करने वाले पंत की तुलना अब महान स्पिनर अनिल कुंबले से की जा रही है।
23 जुलाई को मैच के पहले दिन, 37 रन बनाने के दौरान पंत ने क्रिस वोक्स की गेंद पर रिवर्स स्वीप खेलने की कोशिश की। गेंद बैट के अंदरूनी किनारे से लगकर उनके दाहिने पैर पर जा लगी, जिससे उनके पैर की अंगुली में गंभीर चोट आई। तुरंत दर्द और सूजन के कारण वे मैदान छोड़ने को मजबूर हुए।
मेडिकल जांच में कंपाउंड टो फ्रैक्चर की पुष्टि हुई, जिसके कारण उन्हें 6-8 सप्ताह तक आराम करना पड़ सकता है। इससे वे इंग्लैंड के खिलाफ बाकी टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं।
दूसरे दिन जब भारतीय टीम मुश्किल स्थिति में थी, तो पंत ने सुरक्षात्मक जूता पहनकर दोबारा बल्लेबाजी करने का फैसला किया। ओल्ड ट्रैफर्ड की भीड़ ने खड़े होकर उनका स्वागत किया और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका हौसला बढ़ाया।
कुंबले की याद
पंत के इस कदम ने 2002 में अनिल कुंबले की याद दिला दी, जब उन्होंने एंटीगुआ में जबड़े की हड्डी टूटने के बाद भी 14 ओवर गेंदबाजी की थी और ब्रायन लारा जैसे महान बल्लेबाज को आउट किया था। कुंबले की तरह पंत ने भी साबित किया कि असली खिलाड़ी वही है जो टीम को व्यक्तिगत दुख-दर्द से ऊपर रखता है।
- फैन्स और क्रिकेट विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया पर पंत की बहादुरी की सराहना की
- भारतीय टीम के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि पंत इस दौरे के दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी थे
- क्रिकेट जगत में इस घटना ने खिलाड़ियों की सुरक्षा और टीम के लिए बलिदान की भावना पर नई बहस छेड़ी है
ऋषभ पंत की यह घटना साबित करती है कि सच्ची खेल भावना सिर्फ कौशल में नहीं, बल्कि चरित्र, दृढ़ता और टीम के लिए सब कुछ न्योछावर करने की इच्छा में होती है। कुंबले की तरह पंत भी अब उन किंवदंतियों में शामिल हो गए हैं जो दिखाते हैं कि क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि जज्बे और जुनून की कहानी है।