भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे और मुख्य विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत के साथ मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर हुआ दुर्भाग्यपूर्ण हादसा अब और भी गंभीर रूप ले चुका है। चौथे टेस्ट मैच के पहले दिन, जब पंत अपनी विशिष्ट आक्रामक शैली में 37 रनों की पारी खेल रहे थे, तब इंग्लैंड के तेज गेंदबाज क्रिस वोक्स की एक गेंद ने उनकी खुशी को दुख में बदल दिया।
68वें ओवर में रिवर्स स्वीप शॉट खेलने के प्रयास में पंत के दाहिने पैर के पंजे पर गेंद जोरदार टक्कर से लगी, जिससे तुरंत ही उनके चेहरे पर असहनीय पीड़ा की छाया दिखाई दी। चोट की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पंत, जो अपनी मजबूत फिटनेस और दर्द सहने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं, वे भी पैर पर सामान्य भार डालने में असमर्थ हो गए और फिजियोथेरेपिस्ट तथा मेडिकल स्टाफ की तत्काल सहायता के बावजूद स्थिति काबू में नहीं आई।
घायल पंत को मैदान से एंबुलेंस के जरिए तुरंत नजदीकी चिकित्सा केंद्र पहुंचाया गया, जहां विस्तृत स्कैन और जांच की प्रक्रिया शुरू की गई। अब मेडिकल रिपोर्ट्स में सबसे बुरी आशंकाओं की पुष्टि हो गई है – ऋषभ पंत के दाहिने पैर की अंगुली में फ्रैक्चर की पुष्टि हो गई है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से जारी नवीनतम आधिकारिक बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विस्तृत स्कैन और एक्स-रे के बाद टो फ्रैक्चर (अंगुली की हड्डी में दरार) की पुष्टि हुई है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने पंत को कम से कम 6 सप्ताह का पूर्ण आराम करने की सलाह दी है, जिसका मतलब है कि वे न केवल वर्तमान मैनचेस्टर टेस्ट से बल्कि संपूर्ण इंग्लैंड टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं।
यह निदान उन सभी आशंकाओं को सच साबित करता है जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत के दिग्गजों द्वारा व्यक्त की गई थीं। ऑस्ट्रेलियाई टीम के पूर्व सफल कप्तान रिकी पोंटिंग, जो खुद इसी तरह की चोट का शिकार हो चुके हैं, का कहना सही साबित हुआ कि पंत के पैर में तुरंत आई सूजन और उनकी असहनीय पीड़ा बेहद चिंताजनक संकेत थी। उन्होंने पहले ही चेताया था कि मेटाटार्सल की हड्डियां बहुत नाजुक होती हैं और इनमें चोट का मतलब कई हफ्तों तक मैदान से दूरी हो सकती है। वहीं भारत के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री की टिप्पणी भी सटीक साबित हुई कि यह कोई साधारण चोट नहीं थी।
इंग्लैंड की टीम के सदस्यों और क्रिकेट विश्लेषकों द्वारा व्यक्त की गई चिंताएं भी अब वास्तविकता बन चुकी हैं। स्पिन गेंदबाज लियम डॉसन का कहना कि पंत इस टेस्ट में वापसी नहीं करेंगे, अब पूरी तरह सच साबित हुआ है, लेकिन स्थिति उससे भी गंभीर निकली है क्योंकि वे पूरी सीरीज से ही बाहर हो गए हैं।
पूर्व इंग्लैंड कप्तान माइकल अथरटन द्वारा इसे गंभीर चोट करार देना भी सही था। 6 सप्ताह की रिकवरी अवधि का मतलब है कि पंत इंग्लैंड में शेष दो टेस्ट मैचों के साथ-साथ उसके बाद होने वाली अन्य महत्वपूर्ण सीरीज की शुरुआत भी मिस कर सकते हैं।
यह आधिकारिक पुष्टि टीम इंडिया के लिए एक विनाशकारी खबर है और इसने पूरी टीम की रणनीति को मौलिक रूप से बदल दिया है। पंत, जिन्होंने इसी सीरीज में लीड्स टेस्ट में दो शानदार शतक बनाए थे और लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे थे, की अनुपस्थिति में भारतीय मध्यक्रम में एक अपूरणीय खालीपन हो गया है।
इंग्लैंड की चुनौतीपूर्ण पिच और बदलते मौसम की परिस्थितियों में पंत जैसे आक्रामक और अनुभवी बल्लेबाज का अभाव टीम के लिए गंभीर समस्या बन गया है। अब कप्तान और कोचिंग स्टाफ को तत्काल प्रभाव से ध्रुव जुरेल को मुख्य विकेटकीपर की जिम्मेदारी देनी होगी, लेकिन पंत की गतिशील बल्लेबाजी, स्ट्राइक रोटेशन और दबाव की परिस्थितियों में उनके बेमिसाल प्रदर्शन की भरपाई करना बेहद मुश्किल काम होगा।
इस स्थिति ने भारतीय टीम प्रबंधन के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। वर्तमान में सीरीज 2-1 से इंग्लैंड के पक्ष में है और पंत की अनुपस्थिति में शेष टेस्ट मैचों में वापसी करना और भी कठिन हो गया है। जुरेल को न केवल विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभालनी होगी बल्कि मध्यक्रम में स्थिरता भी प्रदान करनी होगी। इसके अतिरिक्त, टीम को अपनी बल्लेबाजी क्रम में भी बदलाव करना पड़ सकता है और अधिक रक्षात्मक रणनीति अपनानी पड़ सकती है।
6 सप्ताह की रिकवरी अवधि का मतलब यह भी है कि पंत आगामी महत्वपूर्ण सीरीज की शुरुआत भी मिस कर सकते हैं, जो भारतीय क्रिकेट के लिए दीर्घकालिक चिंता का विषय है। उनकी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग दोनों में उनकी उपस्थिति टीम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर विदेशी परिस्थितियों में।
फिलहाल, पूरा क्रिकेट जगत पंत की जल्दी रिकवरी की कामना कर रहा है, लेकिन तत्काल प्राथमिकता यह है कि भारतीय टीम इस बड़े झटके से उबरकर इंग्लैंड में शेष टेस्ट मैचों में बेहतर प्रदर्शन करे। इस चोट ने न केवल वर्तमान सीरीज को प्रभावित किया है बल्कि भारतीय क्रिकेट की भविष्य की योजनाओं पर भी गहरा असर डाला है।