छत्तीसगढ़ भिलाई में सड़क दुर्घटनाओं का कहर, 7 महीने में 226 लोगों की मौत, प्रशासनिक प्रयासों के बावजूद नहीं रुक रहा हादसों का सिलसिला

छत्तीसगढ़ के भिलाई जिले में सड़क दुर्घटनाओं ने एक भयावह रूप ले लिया है। साल 2025 के पहले सात महीनों में ही 226 लोगों की जान सड़क हादसों में चली गई है, जिससे जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की तमाम कोशिशों पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के बावजूद हादसों पर लगाम नहीं लग पा रहा है।

भिलाई जिले में अंजोरा बाईपास से कुहारी तक फैला राष्ट्रीय राजमार्ग करीब 45 किलोमीटर लंबा है, जिसके बीच में 11 प्रमुख चौराहे स्थित हैं। इन चौराहों पर नियमित रूप से ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाएं होती रहती हैं। शहर के बीचों बीच स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग पर हादसों को कम करने के लिए चार फ्लाई ओवर ब्रिज का निर्माण कराया गया है, जिससे भारी और मध्यम वाहनों का दबाव मार्केट क्षेत्रों से काफी कम हुआ है।

यहाँ भिलाई जिले के 2025 के सड़क दुर्घटना आंकड़ों की तालिका है:

महीनाकुल दुर्घटनाएंघायल व्यक्तिमृतक संख्या
जनवरी13711547
फरवरी1029030
मार्च12010737
अप्रैल11410540
मई11610323
जून1038527
जुलाई917822
कुल योग783683226

मुख्य बिंदु:

  • 7 महीनों में कुल 783 सड़क दुर्घटनाएं
  • 683 लोग घायल हुए
  • 226 लोगों की मौत
  • जनवरी में सबसे अधिक दुर्घटनाएं (137) और मौतें (47)
  • जुलाई में सबसे कम दुर्घटनाएं (91) और मौतें (22)
  • औसतन प्रतिदिन लगभग 4 दुर्घटनाएं हो रही हैं

ASP ट्रैफिक दुर्ग ऋचा मिश्रा ने बताया कि सड़क इंजीनियरिंग में व्यापक सुधार कराए गए हैं। गड्ढों की भराई, साइन बोर्ड लगवाना, ट्रैफिक सिग्नल की व्यवस्था जैसे कई कदम उठाए गए हैं। हाल ही में गुरुद्वारा के पास हुई दुर्घटना में चालक ने कान में ईयरफोन लगाया हुआ था और हेलमेट भी नहीं पहना था। इससे पता चलता है कि लोगों में ट्रैफिक सेंस की गंभीर कमी है।

ट्रैफिक पुलिस द्वारा जागरूकता के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। स्कूल और कॉलेजों में छात्रों के बीच पुलिस पहुंचकर ट्रैफिक नियमों की जानकारी दे रही है। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। वीडियो और फुटेज के जरिए ट्रैफिक नियमों का महत्व समझाया जा रहा है। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी जागरूकता संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं।

सेवानिवृत्त ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ट्रैफिक प्लानिंग में गंभीर खामियां हैं। नेहरू नगर गुरुद्वारा से कुहारी तक सर्विस लेन पर अवैध कब्जा हो गया है। स्टेट हाईवे की भी यही स्थिति है। घड़ी चौक के दोनों तरफ सर्विस लेन जाम है। पावर हाउस, भिलाई-3, कुहारी में सर्विस लेन पर अवैध पार्किंग की समस्या गंभीर है। जिला प्रशासन इन अवैध कब्जों को हटाने में असफल साबित हो रहा है।

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दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस मिलकर कई महत्वपूर्ण प्रयास कर रहे हैं। नगर निगम की सहायता से चौक-चौराहों पर आधुनिक सिग्नल सिस्टम, ब्लिंकर, रंबलर स्ट्रिप्स और साइन बोर्ड लगवाए गए हैं। सड़क इंजीनियरिंग में बड़े सुधार किए गए हैं और जगह-जगह बने गड्ढों की भराई कराई गई है। NH-53 की 42 किलोमीटर लंबाई में 65 से अधिक मिडिल कट बंद कराए गए हैं। रोजाना चेकिंग अभियान चलाकर चालानी कार्रवाई की जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से समस्या का समाधान नहीं होगा। लोगों की मानसिकता में बदलाव लाना होगा और ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी। तेज गति से वाहन चलाना, मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए ड्राइविंग करना, हेलमेट न पहनना जैसी आदतों को छोड़ना होगा।

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भिलाई में हो रहे हादसों की मुख्य वजहें तेज गति, लापरवाही, नशे में गाड़ी चलाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी है। युवाओं में बढ़ता रैश ड्राइविंग का चलन भी चिंता का विषय है। दोपहिया वाहन चालकों में हेलमेट न पहनने की प्रवृत्ति अधिक दिखाई दे रही है।

अगस्त 2025 में अब तक आधा दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जो दर्शाता है कि समस्या और भी गंभीर होती जा रही है। जिला प्रशासन को इस दिशा में और भी प्रभावी कदम उठाने होंगे। सिर्फ चालानी कार्रवाई पर निर्भर न रहकर व्यवस्था प्रबंधन पर भी ध्यान देना होगा।

समाधान के रूप में सुझाव दिए जा रहे हैं कि सर्विस लेन से अवैध कब्जे हटाए जाएं, नियमित पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए, CCTV निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए और जागरूकता अभियान को और भी व्यापक बनाया जाए। तभी जाकर भिलाई में सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा और अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकेगा।

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