बिलासपुर: स्कूल टीचर पर यौन शोषण के आरोप, तीन महीने फरार रहने के बाद गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक निजी स्कूल के 55 वर्षीय शिक्षक राम मूरत कौशिक को छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार किया गया है। सकरी थाना क्षेत्र में घटित यह मामला शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मामले की जानकारी के अनुसार, आरोपी शिक्षक राम मूरत कौशिक पर कई छात्राओं के साथ छेड़खानी और शारीरिक रूप से अनुचित व्यवहार (बैड टच) करने का आरोप लगा है। पुलिस के अनुसार, यह घटना लंबे समय से चली आ रही थी, जिससे छात्राएं काफी परेशान थीं। परंतु डर और झिझक के कारण वे इसकी शिकायत नहीं कर पा रही थीं।

हिम्मत जुटाकर की गई शिकायत

जब स्थिति असहनीय हो गई, तो पीड़ित छात्राओं ने अपनी परेशानी स्कूल के हेडमास्टर के सामने रखी। हेडमास्टर ने इस गंभीर मामले को तुरंत प्रशासन के ध्यान में लाया और आवश्यक कार्रवाई की मांग की। शिकायत मिलने के तुरंत बाद शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

तीन महीने तक रहा फरार

आरोप लगने के बाद राम मूरत कौशिक लगभग तीन महीने तक फरार रहा, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही थी और विभिन्न स्थानों पर छापेमारी भी की गई। अंततः पुलिस की कड़ी मेहनत रंग लाई और आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता मिली।

कानूनी कार्रवाई और POCSO एक्ट

इस मामले में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। POCSO एक्ट बच्चों के यौन शोषण के खिलाफ सख्त कानून है, जिसमें कड़ी सजा का प्रावधान है। चूंकि पीड़ित नाबालिग हैं, इसलिए यह मामला और भी संवेदनशील हो जाता है।

शिक्षा जगत में बढ़ती चिंता

यह घटना शिक्षा जगत में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में शिक्षित करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि वे ऐसी स्थितियों में समय रहते आवाज उठा सकें।

सामाजिक जिम्मेदारी

इस मामले से यह सबक मिलता है कि अभिभावकों, शिक्षकों और प्रशासन सभी को मिलकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। बच्चों के साथ खुली बातचीत करना, उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना और त्वरित कार्रवाई करना समय की मांग है। साथ ही ऐसे मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए तेज़ी से कानूनी प्रक्रिया पूरी करना भी आवश्यक है।

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