छत्तीसगढ़ के यात्रियों के लिए ट्रेन से सफर करना आजकल किसी सजा से कम नहीं है। अप्रैल से जून 2025 के बीच दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने चौंकाने वाले 1,994 ट्रेनें रद्द कर दीं। इनमें से 911 ट्रेनें – यानी लगभग 48% – रायपुर डिवीजन से गुजरने वाली थीं। यह आंकड़ा साफ तौर पर बताता है कि रायपुर में स्थिति कितनी गंभीर और चिंताजनक है।
सिर्फ रद्दीकरण ही नहीं, बल्कि इस दौरान 11,700 से ज्यादा ट्रेनें देर से चलीं। यात्रियों के लिए यह दोहरी मार है – न तो समय पर ट्रेन मिल रही है और न ही पक्का भरोसा कि ट्रेन चलेगी भी या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल: कितने यात्री प्रभावित हुए?
लेकिन सबसे चौंकाने वाली और शर्मनाक बात यह है कि रेलवे के पास इसका कोई डेटा ही नहीं है कि इन हजारों ट्रेन रद्दीकरणों से कितने यात्री प्रभावित हुए! यह जानकारी RTI (सूचना का अधिकार) के जरिए सामने आई है।
यह दिखाता है कि हमारे रेलवे सिस्टम में जवाबदेही कितनी कम है। ट्रेनें तो गिनी जा रही हैं, लेकिन इंसानों की परेशानी का कोई हिसाब नहीं। यात्रियों के साथ हो रही इस नाइंसाफी का कोई रिकॉर्ड तक नहीं रखा जा रहा।
रायपुर डिवीजन में रोज 16 करोड़ का नुकसान!
रायपुर डिवीजन की माली हालत देखकर आप दंग रह जाएंगे। यहां हर महीने 1.68 लाख टिकट रद्द हो रहे हैं। इससे अनुमानित 16 करोड़ रुपये का मासिक नुकसान हो रहा है। यह राशि किसी छोटे शहर के पूरे साल के बजट के बराबर है!
लेकिन यहां एक और मजेदार बात है। SECR मुख्यालय का दावा है कि अप्रैल से जून के बीच केवल 3.05 लाख रुपये की रिफंड दी गई। अरे भाई, 16 करोड़ के नुकसान में सिर्फ 3 लाख की रिफंड? यह तो गणित भी नहीं मिल रहा!
इस रिफंड डेटा में भी कोई साफता नहीं है। यह पता ही नहीं चल रहा कि कितनी रिफंड ट्रेन रद्द होने से दी गई, कितनी देरी की वजह से, और कितनी यात्रियों की अपनी मर्जी से।
3 महीने की भयानक तस्वीर
20 मार्च से 20 जून के बीच का हाल देखिए:
- कुल बुकिंग: 20.3 लाख टिकट
- रद्द टिकट: 5 लाख से ज्यादा
- कुल रिफंड: 48 करोड़ रुपये से ज्यादा
- फिर भी मासिक कमाई: 40 करोड़ रुपये
यानी हर चौथा टिकट रद्द हो रहा है! यह कैसी रेल सेवा है जहां 25% यात्रियों को निराशा हाथ लग रही है?
कौन सा इलाका कितना त्रस्त?
1,994 रद्द ट्रेनों का बंटवारा कुछ यूं है:
- नागपुर डिवीजन: 1,516 ट्रेनें (सबसे ज्यादा)
- रायपुर डिवीजन: 911 ट्रेनें (48% हिस्सेदारी)
- बिलासपुर डिवीजन: 690 ट्रेनें
सीनियर DCM अवधेश कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि कुछ ट्रेनें कई डिवीजन से होकर गुजरती हैं, इसलिए संख्या में थोड़ा ओवरलैप है। लेकिन यह तकनीकी बात यात्रियों की परेशानी कम तो नहीं कर रही।
असली वजह क्या है?
त्रिपाठी जी के मुताबिक, यह सब इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की वजह से हो रहा है:
- ट्रैक डबलिंग: पुराने सिंगल ट्रैक को डबल बनाया जा रहा है
- ऑटोमेटिक सिग्नलिंग: आधुनिक सिग्नल सिस्टम लगाया जा रहा है
- अन्य सुधार: स्टेशनों और अन्य सुविधाओं का उन्नयन
उनका कहना है कि अभी थोड़ी तकलीफ है, लेकिन भविष्य में सेवा काफी बेहतर हो जाएगी। पर सवाल यह है कि क्या इतनी बड़ी परेशानी के बिना यह काम नहीं हो सकता था?
यात्रियों की आवाज
रोज सफर करने वाले यात्री बताते हैं कि अब ट्रेन का टिकट बुक करने से पहले दस बार सोचना पड़ता है। ऑफिस जाना हो या कोई जरूरी काम, ट्रेन पर भरोसा नहीं किया जा सकता। कई लोग बस और प्राइवेट गाड़ियों का रुख कर रहे हैं।
आगे का रास्ता
यह स्थिति साफ तौर पर दिखाती है कि भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में कुछ बुनियादी चीजों की कमी है:
- बेहतर योजना बनाने की जरूरत
- यात्रियों के साथ साफ संवाद की आवश्यकता
- यात्री-केंद्रित नीतियां बनानी होंगी
- डेटा रखने की व्यवस्था सुधारनी होगी
रेलवे को समझना होगा कि विकास के नाम पर यात्रियों को इतनी परेशानी देना सही नहीं है। आखिर रेल सेवा जनता के लिए है, जनता रेल सेवा के लिए नहीं!