SSC Phase-13 परीक्षा रद्द: Eduquity विवाद, तकनीकी गड़बड़ियों और बार-बार कैंसिलेशन पर अभ्यर्थियों का देश-व्यापी विरोध

नई दिल्ली, 2 अगस्त 2025—स्टाफ सेलेक्शन कमिशन (SSC) की चयन पोस्ट फेज-13 भर्ती परीक्षा में हुई तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ियों के विरोध में देश-भर के लाखों अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए हैं। दिल्ली के जन्तर-मन्तर, सीजीओ कॉम्प्लेक्स और डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ऐंड ट्रेनिंग (DoPT) कार्यालय के बाहर दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रहा, जहां छात्रों के साथ शिक्षकों ने भी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर नारेबाज़ी की। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की तो धक्का-मुक्की हुई और दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें लोकप्रिय शिक्षिका नीतू सिंह भी शामिल रहीं।

परेशान अभ्यर्थियों का मुख्य आरोप है कि SSC ने बिना पूर्व सूचना के बार-बार फेज-13 परीक्षा रद्द की, जिस कारण हज़ारों उम्मीदवार लंबी दूरी तय करके परीक्षा केंद्र पहुंचे और वहाँ सिर्फ सूचना-पत्र चिपका देख वापस लौटे। जयपुर के एक छात्र को अंडमान-निकोबार का केंद्र आवंटित होने जैसी घटनाएँ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती हैं। कई राज्यों में प्रवेश-पत्र निर्धारित चार दिन पहले के बजाय मात्र दो दिन पहले वेबसाइट पर अपलोड हुए, परिणामस्वरूप यात्राओं और ठहरने के इंतज़ाम में छात्रों को दोहरा खर्च उठाना पड़ा।

परीक्षा केंद्रों पर सर्वर क्रैश, ब्लैक-आउट स्क्रीन, माउस खराब होने और बायोमेट्रिक सत्यापन फेल होने से भी अभ्यर्थियों का क़ीमती समय नष्ट हुआ। कई केन्द्रों पर सुरक्षा कर्मियों द्वारा बदसलूकी और स्टाफ के अभद्र व्यवहार की शिकायतें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। इन घटनाओं ने #SSCMisManagement, #SSCSystemSudharo जैसे हैशटैग को ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर ट्रेंडिंग टॉपिक बना दिया।

विवाद की जड़ में वह निजी कंपनी Eduquity Career Technologies है, जिसे इस वर्ष फेज-13 परीक्षा कराने का कॉन्ट्रैक्ट मिला। छात्रों का आरोप है कि Eduquity पूर्व में व्यापम घोटाले जैसी अनियमितताओं से जुड़ी रही और शिक्षा विभाग द्वारा ब्लैक-लिस्ट होने के बावजूद उसे ठेका दिया गया। सूचना के अनुसार कंपनी ने प्रति परीक्षार्थी महज़ ₹220 की सबसे कम बोली लगाकर अनुबंध हासिल किया, जबकि अनुभवी दावेदार TCS ने लगभग ₹350 प्रति कैंडिडेट का प्रस्ताव दिया था। कम लागत के बदले गुणवत्ता से समझौते की आशंका ने अभ्यर्थियों के गुस्से को और भड़का दिया।

तकनीकी खामियों से तंग परीक्षार्थियों ने मांग उठाई है कि Eduquity का अनुबंध तत्काल रद्द कर नई पारदर्शी एजेंसी नियुक्त की जाए और फेज-13 परीक्षा की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए। साथ ही आगामी SSC CGL 2025 परीक्षा में भाग लेने जा रहे लगभग 30 लाख अभ्यर्थियों की सुरक्षा, निष्पक्षता और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत कार्ययोजना सार्वजनिक करने की माँग की जा रही है।

DoPT के अधिकारियों ने फिलहाल छात्र प्रतिनिधियों से वार्ता का आश्वासन दिया है, मगर कोई ठोस लिखित रोडमैप जारी नहीं किया गया। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर परीक्षा-शेड्यूल, सेंटर-एलॉटमेंट और टेक्नोलॉजी पार्टनर से जुड़ी पारदर्शी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड नहीं की गई तो आंदोलन को देश-व्यापी रेल-रोको और भर्ती-बहिष्कार तक विस्तार दिया जाएगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार पेपर रद्द होने और तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से उन्हें न केवल आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है, बल्कि मानसिक तनाव और रोजगार में देरी का सामना भी करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार की तमाम डिजिटल रिफॉर्म पहलों के बावजूद यदि सबसे बड़ी भर्ती परीक्षा संस्था समय पर पारदर्शी परीक्षाएँ आयोजित नहीं कर पाती, तो इससे युवाओं का सरकारी तंत्र पर भरोसा कमजोर होगा। वहीँ, अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि बेरोज़गारी दर पहले से ऊँची होने के कारण ऐसी अव्यवस्था रोजगार-क्षेत्र में नई अनिश्चितता पैदा कर सकती है। अब निगाहें DoPT और SSC पर हैं कि वे छात्रों की माँगों पर कितना शीघ्र और सख़्त एक्शन लेते हैं, जिससे आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल हो सके और युवा उम्मीदवारों के भविष्य पर मंडराते संकट के बादल छँट सकें.

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