सुप्रीम कोर्ट ने कलानिधि मारन और केएएल एयरवेज की स्पाइसजेट से 1,323 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग वाली याचिकाओं को पूर्णतः खारिज कर दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने बुधवार 23 जुलाई 2025 को इस मामले में अंतिम फैसला सुनाते हुए कहा कि विशेष अनुमति याचिकाओं में कोई दम नहीं है और इन्हें खारिज किया जाता है। यह निर्णय एक दशक से अधिक समय से चल रहे कानूनी विवाद का अंत करता है और स्पाइसजेट के वर्तमान प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण राहत का काम करता है।
मामले की शुरुआत फरवरी 2015 में हुई थी जब मीडिया मुगल कलानिधि मारन और उनकी कंपनी केएएल एयरवेज ने स्पाइसजेट में अपनी 58.46 प्रतिशत हिस्सेदारी महज दो रुपये में अजय सिंह को ट्रांसफर कर दी थी। इस सौदे के तहत मारन और केएएल एयरवेज को 679 करोड़ रुपये के बदले रिडीमेबल वारंट और प्रेफरेंस शेयर मिलने थे, लेकिन ये इंस्ट्रूमेंट्स कभी जारी नहीं किए गए। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हुई।
2018 में तीन सदस्यीय आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल ने मारन और केएएल एयरवेज के 1,323 करोड़ रुपये हर्जाने के दावे को खारिज कर दिया था। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने स्पाइसजेट को 579 करोड़ रुपये ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया।
दिल्ली उच्च न्यायालय में जुलाई 2023 में सिंगल जज ने आर्बिट्रल अवार्ड को बरकरार रखा था। इसके तुरंत बाद स्पाइसजेट और अजय सिंह ने अपील की और मई 2024 में डिवीजन बेंच ने मामले को फ्रेश विचार के लिए एक अलग सिंगल जज के पास भेज दिया, जिससे रिफंड की प्रक्रिया रुक गई।
अदालती कार्यवाही के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय ने मारन और केएएल एयरवेज के आचरण पर कड़ी टिप्पणी की थी। न्यायालय ने कहा था कि उन्होंने अपनी अपीलों में देरी करके “कैलकुलेटेड गैंबल” खेला है और महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाया है। अदालत ने इसे “फेंस सिटिंग” करार दिया था, जिसका मतलब है कि वे सभी पक्षों और अदालतों को अपनी एप्लिकेशन की स्थिति के बारे में अंधेरे में रखे हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मारन और केएएल एयरवेज की अपीलों में अनुचित देरी हुई है और प्रक्रियागत खामियां हैं जो महीनों तक ठीक नहीं की गईं। शीर्ष अदालत ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
इस फैसले का शेयर बाजार पर तत्काल प्रभाव देखने को मिला। स्पाइसजेट के शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जो निवेशकों की राहत को दर्शाता है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि बाजार इस लंबे समय से चल रहे कानूनी अनिश्चितता के समाधान को सकारात्मक रूप में देख रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारतीय विमानन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। स्पाइसजेट जैसी कंपनियों के लिए यह निर्णय स्पष्टता प्रदान करता है और भविष्य में ऐसे विवादों के लिए एक मिसाल स्थापित करता है। कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत ने समयबद्ध और पारदर्शी मुकदमेबाजी प्रथाओं के लिए एक मजबूत संदेश दिया है।
स्पाइसजेट के वर्तमान चेयरमैन अजय सिंह के लिए यह फैसला एक बड़ी जीत है। अब कंपनी बिना किसी कानूनी बाधा के अपने व्यापारिक संचालन पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। इस विवाद के समाप्त होने से कंपनी की भविष्य की योजनाओं को मजबूती मिलेगी।
कलानिधि मारन, जो सन टीवी नेटवर्क के प्रमोटर हैं और पूर्व केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं, के लिए यह फैसला निराशाजनक है। उनकी कंपनी केएएल एयरवेज के साथ मिलकर वे इस मामले में हर स्तर पर हार गए हैं। आर्बिट्रेशन से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, हर जगह उनके दावे खारिज हुए हैं।
यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत में विवादों के निपटारे के लिए एक उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। न्यायपालिका ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रक्रियागत देरी और तथ्यों को छुपाने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस अंतिम फैसले के साथ लगभग दस साल पुराना यह कानूनी विवाद समाप्त हो गया है। स्पाइसजेट अब बिना किसी कानूनी दबाव के अपने परिचालन को आगे बढ़ा सकती है और भारतीय विमानन क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत बना सकती है।