छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या ने एक बार फिर चिंताजनक रूप धारण कर लिया है। माना क्षेत्र में मंगलवार को एक पागल कुत्ते ने दिनभर में 12 लोगों को अपना निशाना बनाया, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। स्थानीय निवासी घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं और प्रशासन की तरफ से तत्काल कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।
घटना का विवरण और समयसीमा
मंगलवार की सुबह से शुरू हुआ यह आतंक देर रात तक जारी रहा। भूरे रंग का यह पागल कुत्ता माना क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में घूमता रहा और अंधाधुंध लोगों पर हमले करता रहा। पीड़ितों में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। कुत्ते का व्यवहार असामान्य रूप से आक्रामक था और वह लगातार इधर-उधर भागकर लोगों को काटता रहा।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, यह कुत्ता अलग-अलग गलियों और मोहल्लों में अचानक प्रकट होता था और बिना किसी उकसावे के लोगों पर टूट पड़ता था। इसके हमले की कोई निर्धारित पैटर्न नजर नहीं आई, जिससे लोगों में और भी ज्यादा डर बना हुआ है।
नगर पंचायत की तत्काल कार्रवाई
माना क्षेत्र में पागल कुत्ते की घटना की जानकारी मिलते ही नगर पंचायत प्रशासन ने तुरंत एक्शन मोड में आकर दो विशेष टीमें तैनात कीं। इन टीमों में पशु नियंत्रण विशेषज्ञ, स्वास्थ्य कर्मी और स्थानीय पुलिस के जवान शामिल हैं। टीमों को विशेष उपकरण और ट्रैंक्विलाइजर गन के साथ भेजा गया ताकि कुत्ते को बिना नुकसान पहुंचाए पकड़ा जा सके।
हालांकि, देर रात तक चली इस ऑपरेशन में टीमों को पूर्ण सफलता नहीं मिली। कुत्ते की चालाकी और तेजी के कारण वह बार-बार टीमों के हाथों से फिसल गया। नगर पंचायत के अधिकारियों ने बताया कि खोजी अभियान निरंतर जारी है और जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
अधिकारियों के बयान और चिंताएं
नगर पंचायत माना कैंप के उपाध्यक्ष के. याबू ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कुत्ता अत्यधिक खतरनाक है और विभिन्न क्षेत्रों में घूमकर लोगों को अपना शिकार बना रहा है। उन्होंने बताया कि कुत्ता भूरे रंग का है और इसका व्यवहार सामान्य आवारा कुत्तों से बिल्कुल अलग है। वह लगातार अलग-अलग इलाकों में सक्रिय रहकर लोगों को परेशान कर रहा है।
सीएमओ सौरभ बाजपेयी ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें संदेह है कि किसी ने जानबूझकर इस पागल कुत्ते को माना क्षेत्र में लाकर छोड़ा है। उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार किसी षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता है या फिर किसी की लापरवाही का नतीजा है। बाजपेयी ने आश्वासन दिया कि दो टीमों के बावजूद कुत्ता अभी तक पकड़ में नहीं आया है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है और जल्द ही सफलता मिलेगी।
स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल
माना क्षेत्र के निवासियों में इस घटना के बाद व्यापक डर और दहशत का माहौल है। लोग अपने घरों से बाहर निकलने में झिझक रहे हैं और दैनिक कार्यों में भी परेशानी हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावक विशेष रूप से चिंतित हैं और कई लोगों ने अपने बच्चों को घर पर ही रखने का फैसला लिया है।
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की संख्या में काफी कमी आई है और लोग जरूरी सामान खरीदने के लिए भी बाहर आने से बच रहे हैं। सड़कों पर आवाजाही में स्पष्ट रूप से कमी देखी जा सकती है और शाम होते ही लोग अपने घरों में दुबक जाते हैं।
रायपुर में बढ़ती कुत्तों की समस्या
यह घटना रायपुर में आवारा कुत्तों की लगातार बढ़ती समस्या को उजागर करती है। पिछले कुछ महीनों में शहर के विभिन्न इलाकों में कुत्तों के हमले की घटनाएं बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या, अव्यवस्थित कचरा प्रबंधन और पशुओं के लिए उचित आवास की कमी इस समस्या के मुख्य कारण हैं।
स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी और सुझाव
स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना के बाद आम जनता को कई सुझाव दिए हैं। विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति किसी पागल कुत्ते का शिकार होता है तो उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जाना चाहिए। रेबीज के खतरे को देखते हुए एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन जरूरी है।
डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद घाव को तुरंत साफ पानी और साबुन से धोना चाहिए। इसके अलावा एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। 24 घंटे के अंदर मेडिकल सहायता लेना अनिवार्य है।
प्रशासन की भविष्य की योजनाएं
नगर पंचायत प्रशासन ने बताया कि इस घटना के बाद पूरे माना क्षेत्र में आवारा कुत्तों की गिनती और उनके स्टेरिलाइजेशन की व्यापक योजना बनाई जा रही है। साथ ही पशु चिकित्सकों की एक विशेष टीम भी तैयार की जाएगी जो ऐसी आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर सके।
प्रशासन का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए नियमित पेट्रोलिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा। स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।
यह घटना न केवल माना क्षेत्र बल्कि पूरे रायपुर शहर के लिए एक चेतावनी है कि आवारा पशुओं की समस्या को गंभीरता से लेना जरूरी है। तत्काल और दीर्घकालिक दोनों तरह के समाधान की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।