छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में रविवार सुबह एक गंभीर सड़क दुर्घटना होते-होते टल गई, जब दल्लीराजहरा से दुर्ग की ओर जा रही पायल ट्रैवल्स की एक यात्री बस का ड्राइवर अचानक बेहोश हो गया। इस घटना में ड्राइवर समेत पांच लोग घायल हुए हैं, जबकि करीब 40 यात्री मौत के मुंह से बचकर निकले हैं।
गुंडरदेही थाना क्षेत्र के सिकोसा गांव के पास घटित इस हादसे में कंडक्टर की तत्परता और सूझबूझ की वजह से एक बड़ी त्रासदी से बचा जा सका। जब बस का ड्राइवर गिरधारी निर्मलकर अचानक बेहोश हो गया, तो कंडक्टर ने तुरंत स्थिति को समझते हुए ब्रेक लगाने की कोशिश की। हालांकि बस की गति को पूरी तरह नियंत्रित नहीं किया जा सका और वह सड़क किनारे एक बड़े पेड़ से जा टकराई।
घटना के प्रत्यक्षदर्शी वीरेंद्र साहू ने बताया कि बस के सामने बैठे यात्रियों ने सबसे पहले देखा कि ड्राइवर अचानक बेहोश हो गया था। जब यात्रियों और कंडक्टर ने मिलकर उसे बाहर निकाला, तब भी वह होश में नहीं था। इस दौरान बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे के पेड़ से जा भिड़ी, जिससे कई यात्रियों को चोटें आईं।
हादसे में घायल होने वालों में मुख्य रूप से 40 वर्षीय ड्राइवर गिरधारी निर्मलकर और पटेली डौंडी से ग्वालियर जा रहे 45 वर्षीय यात्री अनिल शर्मा शामिल हैं। इनके अलावा तीन अन्य यात्रियों को भी मामूली चोटें आई हैं। सभी घायलों को तत्काल 108 एंबुलेंस के जरिए गुंडरदेही स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार तीन घायलों की हालत स्थिर है और उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि ड्राइवर की अचानक तबीयत बिगड़ने से यह हादसा हुआ। संभावना है कि उसका ब्लड प्रेशर बढ़ गया हो, शुगर की समस्या हो या फिर किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण से वह बेहोश हुआ हो। ड्राइवर के पूरी तरह होश में आने के बाद उसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी।
हालांकि, घायल यात्री अनिल शर्मा ने एक गंभीर आरोप लगाया है कि बस पहले से ही तकनीकी रूप से खराब थी। उनका कहना है कि पीछे के पहिए का पट्टा टूटा हुआ था, जिसकी वजह से बस एक तरफ झुककर चल रही थी। यात्रियों ने इस बारे में चालक और परिवहन कंपनी को पहले भी बताया था, लेकिन इसके बावजूद बस को संचालित किया जा रहा था। यदि यह आरोप सच है, तो यह परिवहन कंपनी की लापरवाही का मामला बनता है।
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इस हादसे में सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि घटना के समय बस की रफ्तार कम थी, जिसके कारण अधिक जनहानि से बचा जा सका। यदि बस तेज गति से चल रही होती तो नतीजे बहुत ही भयावह हो सकते थे। परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए ड्राइवरों की नियमित स्वास्थ्य जांच और वाहनों की तकनीकी जांच बेहद जरूरी है।
गुंडरदेही पुलिस ने घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और सभी संभावित कारणों की छानबीन की जा रही है। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि वे बस की तकनीकी स्थिति, ड्राइवर के स्वास्थ्य रिकॉर्ड और परिवहन कंपनी के रखरखाव रिकॉर्ड की भी जांच कर रहे हैं। यदि किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हादसे के बाद अन्य यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था के जरिए उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने राहत और बचाव कार्य में तत्परता दिखाई, जिससे स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सका।
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यह घटना छत्तीसगढ़ में सड़क परिवहन की सुरक्षा के मुद्दे को फिर से उजागर करती है। राज्य में बस हादसे अक्सर होते रहते हैं, जिनमें से अधिकतर ड्राइवर की लापरवाही, वाहन की खराब स्थिति या अचानक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण होते हैं। परिवहन विभाग को चाहिए कि वे ड्राइवरों की नियमित स्वास्थ्य जांच और वाहनों की तकनीकी जांच को और भी सख्ती से लागू करें।
इस हादसे से एक सबक यह भी मिलता है कि सार्वजनिक परिवहन में कंडक्टर की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। इस घटना में कंडक्टर की सूझबूझ और तत्काल एक्शन लेने से कई जिंदगियां बच गईं। यात्री सुरक्षा के लिए परिवहन कंपनियों को अपने स्टाफ को आपातकालीन स्थितियों से निपटने की ट्रेनिंग देनी चाहिए।