ट्रंप ने जापान के साथ किया बड़ा व्यापारिक समझौता, 15% पारस्परिक टैरिफ के साथ 550 अरब डॉलर का निवेश

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को जापान के साथ एक व्यापक व्यापारिक समझौते की घोषणा की है, जिसे उन्होंने ‘मैसिव ट्रेड डील’ बताया है। इस समझौते के अंतर्गत जापानी सामानों पर 15 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ लगाया जाएगा और जापान अमेरिका में 550 अरब डॉलर का निवेश करेगा। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब 1 अगस्त की समय सीमा के बाद जापानी सामानों पर 25 प्रतिशत तक का टैरिफ लगने की धमकी दी गई थी।

राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में बताया कि यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगा और अमेरिका में हजारों नई नौकरियां पैदा करेगा। उन्होंने दावा किया कि इस डील से अमेरिका में सैकड़ों हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस समझौते के तहत जापान द्वारा किए जाने वाले 550 अरब डॉलर के निवेश से होने वाले मुनाफे का 90 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका को मिलेगा।

जापानी सरकार ने भी इस समझौते की पुष्टि करते हुए इसका स्वागत किया है। जापान के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने NHK को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट में जो जानकारी दी गई है वह सटीक है और जापान इस समझौते का स्वागत करता है। जापानी प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने बुधवार की सुबह इस समझौते को स्वीकार करते हुए कहा कि यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी है और दोनों देश मिलकर काम कर सकेंगे।

इस व्यापारिक समझौते का सबसे बड़ा फायदा जापान के ऑटोमोबाइल उद्योग को होगा। पहले जापानी वाहनों और ऑटो पार्ट्स पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा था जो अप्रैल 2025 में प्रभावी हुआ था। नए समझौते के तहत यह टैरिफ घटकर 15 प्रतिशत हो गया है। जापान के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ऑटोमोबाइल सेक्टर उनके अमेरिकी निर्यात का एक चौथाई से अधिक हिस्सा है। समझौते की घोषणा के तुरंत बाद जापानी शेयर बाजार में ऑटो कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई, टोयोटा के शेयरों में 11 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।

व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अमेरिका का जापान के साथ 68.5 अरब डॉलर का व्यापार घाटा था। अमेरिका ने जापान से 148.2 अरब डॉलर का सामान आयात किया जबकि जापान को केवल 79.7 अरब डॉलर का निर्यात किया। यह नया समझौता इस व्यापारिक असंतुलन को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री इशिबा ने 550 अरब डॉलर के निवेश पैकेज के बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया कि इसमें जापानी सरकार से संबद्ध संस्थानों से मिलने वाले ऋण और गारंटी शामिल हैं। यह निवेश जापानी कंपनियों को दवा, सेमीकंडक्टर और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनाने में सक्षम बनाएगा। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा।

यह जापान के साथ हुआ समझौता राष्ट्रपति ट्रंप की व्यापक ट्रेड स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। हाल के हफ्तों में उन्होंने फिलीपींस, इंडोनेशिया, ब्रिटेन और वियतनाम के साथ भी समान समझौते किए हैं। सभी समझौते 1 अगस्त की समय सीमा के दबाव में किए गए हैं, जिसके बाद इन देशों के सामानों पर भारी टैरिफ लगने की धमकी दी गई थी। यह दिखाता है कि ट्रंप प्रशासन टैरिफ की धमकी को एक प्रभावी बातचीत के उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।

नए समझौते के तहत जापान के बाजार अमेरिकी निर्यात के लिए और खुले होंगे। इसमें अमेरिकी ऑटोमोबाइल, ट्रक, चावल और कृषि उत्पादों का निर्यात शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी निर्यात पर जापान में कोई टैरिफ नहीं लगेगा, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

हालांकि इस समझौते का स्वागत किया जा रहा है, लेकिन अभी तक न तो व्हाइट हाउस और न ही जापानी सरकार ने समझौते का आधिकारिक दस्तावेज जारी किया है। 550 अरब डॉलर के निवेश के लिए प्रॉफिट शेयरिंग मैकेनिज्म और अन्य तकनीकी विवरणों के बारे में स्पष्टता की जरूरत है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि स्टील और एल्यूमीनियम जैसे अन्य सेक्टरों पर यह समझौता कैसे प्रभाव डालेगा, जिन पर पहले 50 प्रतिशत ड्यूटी लगी थी।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब जापानी प्रधानमंत्री इशिबा को हाल के चुनावों में चुनौती का सामना करना पड़ा है। उनके गठबंधन को अपर हाउस में बहुमत नहीं मिला है और स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार वे जल्द ही इस्तीफा दे सकते हैं। इस राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद, दोनों देशों ने इस महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते को आगे बढ़ाया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता अल्पकालिक रूप से दोनों देशों के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वादे किए गए निवेश कितनी तेजी से साकार होते हैं और व्यावहारिक स्तर पर समझौते का कार्यान्वयन कैसा होता है। यह ट्रेड डील अमेरिका-जापान के द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करती है और आने वाले समय में दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

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