उत्तरकाशी में बादल फटने से हाहाकार: गांव बहा, 60 लापता

5 अगस्त, 2025 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में जबर्दस्त बादल फटा। मंगलवार दोपहर करीब 1:45 बजे हुए इस हादसे ने पूरे इलाके में कहर बरपाया—फ्लैश फ्लड, भूस्खलन, दर्जनों बेघर लोग, दर्ज की गई मौतें, और पवित्र गंगोत्री धाम की सड़कें तक टूट गईं।

धराली गांव, हर्षिल के पास, भारतीय सेना कैंप से महज 4 किमी दूर और खीर गंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बसा है। इसी गांव पर मुसीबत तेज बारिश के बाद आ गई। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया कि 60 से ज्यादा लोग लापता हैं। हालांकि, गांव के निवासी राजेश पंवार के मुताबिक, 10-12 लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं और आंकड़ा बढ़ने का डर है।

बाढ़ व भूस्खलन का असर

बाढ़ ने लगभग 20-25 होटल-होमस्टे और 30-40 घर, दुकानें व दूसरी संपत्ति या तो पूरी तरह बहा दीं या बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दीं। धराली, तीर्थयात्रियों का बड़ा ठिकाना, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। खीर गंगा नदी (या खीर गड़) के ऊपरी क्षेत्र में बादल फटते ही अचानक पानी-मिट्टी का सैलाब बेकाबू हो गया। पर्यटकों ने वीडियो में देखा, मिट्टी व मलबे का झरना पहाड़ से ऐसे बह रहा था जैसे भूचाल आ गया हो—हर दिशा में चीख-पुकार मच गई।

धराली में होटल, होमस्टे और रेस्तरां की भरमार है, जिससे प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम में बाधा आई और जलभराव बढ़ गया। लगातार बारिश और बंद सड़कों से हालात और बिगड़ गए।

राहत-बचाव शुरू, मगर चुनौतियां बरकरार

भारतीय सेना, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, लोकल पुलिस और जिला प्रशासन ने मोर्चा संभाला। हर्षिल के पास तैनात सेना ने सबसे पहले 15 लोगों को सुरक्षित निकाला। आईटीबीपी की 16 सदस्यीय टीम, एनडीआरएफ की 4 टीमें (मानेरा, बाटकोट, देहरादून से) और 2 अतिरिक्त टीमें एयरलिफ्ट के लिए तैनात की गईं। रास्ते बंद, नेटवर्क कमजोर और बारिश रुक-रुक कर चुनौती बनी रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सभी ने दुख जताया और हर स्तर पर मदद का आश्वासन दिया। पीएम ने एक्स पर दुख जताते हुए लिखा, “मैं उत्तरकाशी, धराली की इस त्रासदी से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ।”

असर इतना जबर्दस्त कि गांव ही नहीं, गंगोत्री धाम तक पहुंचने वाली सड़कें भी पूरी तरह टूट गईं। पैदल पुल, पाइपलाइन, बिजली लाइनें तक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। एक स्थानीय व्यक्ति ने इंडिया टुडे को बताया, “होटल से लेकर बाजार—सब कुछ बह गया… ऐसी आफत नहीं देखी कभी।”

भारी बारिश का खतरा जारी

मौसम विभाग ने 10 अगस्त, 2025 तक उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। सुरक्षा के मद्देनज़र देहरादून समेत कई जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि कुल नुकसान का सही आकलन अभी कमजोर नेटवर्क के चलते नहीं हो पा रहा।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मलबे के नीचे 10-12 लोग दबे हो सकते हैं और 20-25 होटल-होमस्टे बह चुके हैं। सोशल मीडिया पर बिकर दुधिया सैलाब के वीडियो छाए हुए हैं—”उत्तरकाशी में फ्लैश फ्लड ने पूरा गांव बहा लिया, कई लोग फंसे हैं।”

सिर्फ इस साल ही नहीं, जून 2025 और 2022 में भी बादल फटने की घटनाएं यहीं हो चुकी हैं। क्षेत्र की भौगोलिक बनावट और लगातार होती कॉमर्शियल डिवेलपमेंट, दोनों ने बीते वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता बढ़ा दी है।

आपदा कालीन सहायता

उत्तरकाशी जिला आपदा परिचालन केंद्र की इमरजेंसी हेल्पलाइन:
01374-222126
01374-22722
9456556431

क्या सबक मिला?

सोशल मीडिया पर सुनी-सुनाई बातों की पुष्टि जरूरी है—कुछ रिपोर्टों में 60 से ज्यादा लापता बताए गए, लेकिन ज़मीनी स्रोत 10-12 की ही पुष्टि करते हैं। धराली का अनियंत्रित शहरीकरण, प्राकृतिक जलप्रवाह में रुकावट—ये इस तबाही का बड़ा कारण रहे। साथ ही, ऐसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में राहत-बचाव की बेहतर तैयारी और व्यवस्था समय की मांग बन गई है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top