एक डिप्टी रेंजर के घर से निकले डेढ़ करोड़! छुपे तहखाने से मिला था सोना-चांदी का खजाना

ओडिशा के जंगल विभाग के एक छोटे अफसर के पास इतना पैसा कहां से आया? सतर्कता विभाग की छापेमारी में खुले चौंकाने वाले राज ओडिशा के कोरापुट जिले में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है। जंगल विभाग के एक साधारण डिप्टी रेंजर के घर से इतनी दौलत मिली है कि लोग अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पा रहे।

क्या हुआ था उस दिन?

24-25 जुलाई को सुबह-सुबह ओडिशा सतर्कता विभाग की टीमें रामचंद्र नेपक के घर पहुंची। रामचंद्र जयपुर फॉरेस्ट रेंज में डिप्टी रेंजर हैं। शुरुआत में तो लगा कि यह एक रूटीन चेकिंग है, लेकिन जो कुछ मिला वो किसी फिल्म के सीन जैसा था।

6 अलग-अलग जगहों पर एक साथ छापे पड़े। जयपुर से लेकर भुवनेश्वर तक की संपत्तियों की तलाशी ली गई। सतर्कता विभाग ने इस ऑपरेशन के लिए 6 डिप्टी एसपी, 5 इंस्पेक्टर और 9 एएसआई की पूरी फौज उतारी थी।

छुपे हुए तहखाने से निकला खजाना

सबसे दिलचस्प बात यह थी कि फ्लैट नंबर 510 में एक गुप्त कमरा मिला। इस छुपे हुए तहखाने से जब अफसरों ने सामान निकाला तो वे भी चौंक गए।

क्या-क्या मिला?

💰 नकदी: एक साथ 1.44 करोड़ रुपये कैश! इतने नोट गिनने के लिए खास काउंटिंग मशीन मंगवानी पड़ी।

🏺 सोना-चांदी:

  • सोने की 4 बिस्किट
  • 16 सोने के सिक्के (हर एक 10 ग्राम का)
  • कुल मिलाकर 1.5 किलो सोना
  • 4.6 किलो से ज्यादा चांदी

🏠 प्रॉपर्टी:

  • एक बहुमंजिला इमारत
  • 3 फ्लैट
  • 2 महंगे प्लॉट
  • 2 कारें

🏦 बैंक में पैसा: खातों में 1.33 करोड़ से भी ज्यादा जमा

सैलरी vs संपत्ति: गणित नहीं मिल रहा

अब सवाल यह है कि एक डिप्टी रेंजर की सैलरी कितनी होती है? रामचंद्र नेपक को महीने में लगभग 69,680 रुपये नेट (76,880 रुपये ग्रॉस) मिलते हैं।

क्या आपको लगता है कि इस सैलरी से इतनी संपत्ति जमा हो सकती है?

यही सवाल सतर्कता विभाग भी पूछ रहा है। उन पर आय से अधिक संपत्ति रखने का गंभीर आरोप लगा है।

कानूनी पेचीदगियां

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत केस दर्ज हो गया है। अब रामचंद्र नेपक को सफाई देनी होगी कि यह सारी संपत्ति कहां से आई।

सतर्कता विभाग अभी भी उनके:

  • बैंक अकाउंट्स की जांच कर रहा है
  • दस्तावेजों को खंगाल रहा है
  • इलेक्ट्रॉनिक सबूत जुटा रहा है

जनता की प्रतिक्रिया

इस खबर के बाद लोगों में तरह-तरह की बातें हो रही हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि “यह तो सिर्फ शुरुआत है, पता नहीं और कितने ऐसे अफसर हैं।”

स्थानीय लोग भी हैरान हैं कि जो व्यक्ति जंगल की रक्षा करने के लिए तैनात था, वह खुद इतनी अवैध संपत्ति जमा कर रहा था।

सरकार का एक्शन प्लान

ओडिशा सरकार इसे अपने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा बता रही है। यह संदेश साफ है कि चाहे अफसर छोटा हो या बड़ा, गलत काम की सजा सबको मिलेगी।

आगे क्या होगा?

जांच अभी भी जारी है। आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं। सतर्कता विभाग का कहना है कि वे हर पत्थर उलटकर देखेंगे।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। एक साधारण जंगल अफसर के पास इतनी संपत्ति का होना सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीरता को दर्शाता है।

💡 क्या आप जानते हैं? यह पूरा ऑपरेशन दो दिन तक चला था और इसमें दर्जनों अफसर शामिल थे। सोना तौलने के लिए खास मशीन भी मंगवानी पड़ी थी क्योंकि वजन इतना ज्यादा था!

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