छत्तीसगढ़: धमतरी में विधवा महिला का आत्महत्या प्रयास, 50 लाख के कर्ज और न्यायिक कुर्की से परेशान होकर तहसील कार्यालय में खाया जहर

धमतरी (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में शुक्रवार को एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। रानी दुलानी नाम की एक महिला ने तहसील कार्यालय में पहुंचकर जहर का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया है। महिला को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका इलाज जारी है। इस घटना ने पूरे जिले में सनसनी मचा दी है और वित्तीय संस्थानों की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं।

घटना के पीछे की कहानी बेहद दुखदायी है। पीड़ित महिला के पति ने चोलामंडलम फाइनेंसियल सर्विसेज से 50 लाख रुपए का लोन लिया था। हालांकि, पति की अचानक मृत्यु हो जाने के बाद यह कर्ज माफ होने के बजाय लगातार बढ़ता ही गया। महिला ने कई बार संबंधित विभागों से संपर्क किया और अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें कहीं से भी सहायता नहीं मिली।

बीमा पॉलिसी में हुई गड़बड़ी का मामला

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि चोलामंडलम कंपनी द्वारा बीमा पॉलिसी कर्ज लेने वाले पति के नाम पर नहीं बल्कि महिला के नाम पर की गई थी। सामान्यतः जो व्यक्ति लोन लेता है, बीमा पॉलिसी भी उसी के नाम पर होती है। लेकिन इस केस में कंपनी की ओर से यह गलती की गई थी जिसका खामियाजा अब विधवा महिला को भुगतना पड़ रहा है।

पीड़ित महिला की बेटी ने इस मामले पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनके पिता नियमित रूप से लोन की किश्तें चुकाते थे। पिता की मृत्यु के बाद यह कर्ज माफ होना चाहिए था, लेकिन बीमा पॉलिसी में हुई गड़बड़ी के कारण यह कर्ज बकाया रह गया। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वे इस भारी-भरकम राशि को चुकाने में असमर्थ रहे।

न्यायालय का कुर्की आदेश और महिला की परेशानी

कर्ज की अदायगी न होने पर न्यायालय ने पीड़ित महिला की संपत्ति की कुर्की का आदेश जारी कर दिया था। इस आदेश से महिला बेहद परेशान हो गई थी। उन्होंने कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए और अधिकारियों से मदद की अपील की। महिला का कहना था कि उन्हें कुछ समय मिले ताकि वे धीरे-धीरे कर्ज चुका सकें, लेकिन किसी ने भी उनकी बात नहीं सुनी।

महिला ने जिलाधिकारी, तहसीलदार, और अन्य स्थानीय अधिकारियों से मुलाकात की थी। उन्होंने अपनी परिस्थिति के बारे में विस्तार से बताया था और कर्ज माफी या इसे चुकाने के लिए अधिक समय की मांग की थी। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

तहसील कार्यालय में हुई घटना

निराशा और हताशा में डूबी महिला ने अंततः शुक्रवार को धमतरी तहसील कार्यालय में पहुंचकर जहर का सेवन कर लिया। इस घटना को देखकर कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और आगंतुकों में हड़कंप मच गया। तहसीलदार ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए अपनी गाड़ी में महिला को बिठाया और जिला अस्पताल पहुंचाया।

वर्तमान में महिला का अस्पताल में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार महिला की स्थिति गंभीर है लेकिन वे उनकी जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इस घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन भी सक्रिय हो गया है।

सामाजिक और आर्थिक पहलू

यह घटना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं की दुर्दशा को उजागर करती है। विशेष रूप से विधवा महिलाओं को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, यह उसका एक जीवंत उदाहरण है। आर्थिक तंगी, सामाजिक सहायता की कमी, और प्रशासनिक उदासीनता के कारण इस तरह की घटनाएं घटित होती रहती हैं।

इस मामले में वित्तीय संस्थान की भूमिका भी संदिग्ध है। चोलामंडलम जैसी बड़ी कंपनी द्वारा बीमा पॉलिसी में की गई त्रुटि ने इस परिवार की जिंदगी को बर्बाद कर दिया है। कंपनी की नीतियों में पारदर्शिता की कमी और ग्राहक सेवा में लापरवाही जैसे मुद्दे सामने आए हैं।

प्रशासनिक और न्यायिक सुधार की आवश्यकता

इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ा है कि वे इस मामले की गहराई से जांच करें और पीड़ित परिवार को राहत प्रदान करें। जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की संपूर्ण जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

न्यायिक स्तर पर भी सुधार की आवश्यकता है। विधवा महिलाओं के मामलों में विशेष संवेदनशीलता दिखाने और उन्हें कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त समय देने की जरूरत है। कुर्की के आदेश जारी करने से पहले पारिवारिक परिस्थितियों का गहराई से अध्ययन किया जाना चाहिए।

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सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का महत्व

यह घटना इस बात को भी रेखांकित करती है कि राज्य और केंद्र सरकार की विधवा पेंशन योजना और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाएं कितनी प्रभावी हैं। इन योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर पर पहुंच रहा है या नहीं, इसकी समीक्षा करने की आवश्यकता है।

छत्तीसगढ़ सरकार को इस तरह के मामलों के लिए एक विशेष सेल का गठन करना चाहिए जो विधवा महिलाओं की समस्याओं का तत्काल समाधान कर सके। इसके अलावा वित्तीय संस्थानों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश बनाने की जरूरत है ताकि वे अपनी नीतियों में अधिक पारदर्शिता और संवेदनशीलता दिखाएं।

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